नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा सुधारों के समर्थक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र की ताकत और छात्रों के शांतिपूर्ण संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि केवल मंत्री के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि अब देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक और स्थायी सुधार लागू किए जाने चाहिए।


सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि अब जवाबदेही तय करने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने का समय आ गया है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक पर प्रभावी रोक और छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।


उन्होंने कहा, "यह लोकतंत्र की जीत है। यह सड़कों से उठी जनता की आवाज और शांतिपूर्ण संघर्ष की जीत है।" वांगचुक ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है और जब लोग संयम व शांति के साथ अपनी मांग रखते हैं तो उसका असर अवश्य दिखाई देता है।


NEET-UG आंदोलन का किया उल्लेख

वांगचुक ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में छात्रों का आंदोलन जारी है। उनके मुताबिक, यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन असली चुनौती अब परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।


छात्रों और समर्थकों को दी बधाई

उन्होंने शिक्षा सुधार की मांग को लगातार उठाने वाले छात्रों और आंदोलन के समर्थकों को बधाई देते हुए कहा कि युवाओं ने अपने अधिकारों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज बुलंद की। साथ ही उन्होंने उन सभी नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस अभियान का शांतिपूर्ण समर्थन किया।


वांगचुक ने अपने संदेश के अंत में कहा कि अब समय केवल जवाबदेही तय करने का नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था बनाने का है, जिस पर देश के हर छात्र का भरोसा कायम रह सके।