रायपुर। छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के उपयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत राज्य में अब तक 91 हजार से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाने और लगभग 305 मेगावाट सौर क्षमता जुड़ने की जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार इस योजना को शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने पर भी काम कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार केंद्र की सौर ऊर्जा योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार आगे बढ़ाने का दावा कर रही है। सरकार का कहना है कि इससे बिजली बिल में कमी के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सकता है।
बिजली बिल में राहत का दावा
रूफटॉप सोलर लगवाने वाले कई परिवारों के बिजली खर्च में कमी आने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन घरों में गर्मियों के दौरान बिजली बिल 5 हजार से 12 हजार रुपये तक पहुंच जाता था, वहां सोलर सिस्टम लगने के बाद बिजली बिल काफी कम या कुछ मामलों में शून्य तक पहुंच रहा है।
इससे परिवारों को बिजली खर्च में बचत होने और घरेलू आय का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती तथा अन्य जरूरतों पर करने का अवसर मिलने की बात कही गई है।
धमतरी के थेन्हीं गांव में सामुदायिक सोलर मॉडल
ग्रामीण क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा के सामुदायिक मॉडल पर काम किया जा रहा है। धमतरी जिले का थेन्हीं गांव इसका एक उदाहरण बताया गया है।
यहां प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत 142 किलोवाट क्षमता का सामुदायिक सोलर प्लांट लगाया गया है। इससे लगभग 71 से 72 परिवारों को बिजली का लाभ मिलने की जानकारी है। इस मॉडल को जिले के 25 अन्य गांवों में भी अपनाने की योजना बताई गई है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित अन्य ग्रामीण इलाकों में भी सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से कुछ उपभोक्ताओं और किसानों के बिजली खर्च में कमी आने की रिपोर्ट है।
महिलाओं को भी सौर ऊर्जा से जोड़ने की पहल
राज्य में महिलाओं को भी सौर ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ ने महिला-नेतृत्व वाले वितरित अक्षय ऊर्जा ढांचे पर काम शुरू किया है।
DWEEPTI पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और महिला स्व-सहायता समूहों को जोड़ने की योजना है। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल योजना की लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें तकनीकी और रोजगार संबंधी गतिविधियों से भी जोड़ना है।
कवर्धा में तैयार हो रहीं ‘सोलर दीदी’
कबीरधाम जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत महिलाओं को सोलर सिस्टम लगाने और उसके रखरखाव का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया है।
इन प्रशिक्षित महिलाओं को ‘सोलर दीदी’ के रूप में तैयार किया जा रहा है। इस पहल के जरिए महिलाओं को तकनीकी कौशल के साथ स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
सौर ऊर्जा से ग्रिड पर दबाव कम करने की कोशिश
रूफटॉप सोलर का उपयोग बढ़ने से परिवार अपनी जरूरत की बिजली का एक हिस्सा स्वयं पैदा कर सकते हैं। इससे पारंपरिक बिजली व्यवस्था पर दबाव कम होने और अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना रहती है।
सरकार का दावा है कि सौर ऊर्जा का विस्तार बिजली खर्च कम करने के साथ ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
सेवा संकल्प अभियान से भी जोड़ी जा रही योजना
राज्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के दौरान भी सौर ऊर्जा को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने की बात कही गई है।
इस दौरान अधिक परिवारों को रूफटॉप सोलर से जोड़ने, ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक मॉडल को बढ़ावा देने और महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने पर जोर दिए जाने की जानकारी है।
सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर फोकस
राज्य में अब तक 91 हजार से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन और 305 मेगावाट क्षमता जुड़ने को सौर ऊर्जा विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले समय में यह योजना कितने अतिरिक्त घरों और गांवों तक पहुंचती है और वास्तविक बिजली बिल में कितनी कमी आती है, इसका आकलन भविष्य के आंकड़ों से स्पष्ट होगा।





