सक्ती। करीब 25 वर्षों से पत्रकारिता के जरिए आम लोगों की समस्याओं और अधिकारों की आवाज उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार अनिल तंबोली अब अपनी ही बेटी को न्याय दिलाने के लिए पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने का दावा कर रहे हैं। बेटी की ओर से दहेज और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत किए जाने के दो महीने से अधिक समय बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने से नाराज तंबोली ने बड़ा फैसला लिया है।

उन्होंने घोषणा की है कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में सक्ती पुलिस अधीक्षक प्रफ्फुल कुमार ठाकुर की ओर से दिया गया सम्मान और प्रशस्ति पत्र वापस लौटा देंगे। तंबोली का कहना है कि बेटी की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के कारण वह पुलिस प्रशासन से मिले सम्मान को अपने पास रखना उचित नहीं समझते।

29 मई को बेटी ने थाने में दी थी शिकायत

अनिल तंबोली के मुताबिक उनकी बेटी ने 29 मई 2026 को सक्ती थाने में दहेज और मानसिक प्रताड़ना को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद प्रकरण को परिवार परामर्श केंद्र भेज दिया गया। यहां 27 जून को पति-पत्नी की काउंसलिंग कराई गई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।

तंबोली का दावा है कि काउंसलिंग के बाद उनकी बेटी को थाने में आगे की कार्रवाई के लिए जाने की सलाह दी गई। इसके बाद 29 जून को परिवार परामर्श केंद्र से बयान की प्रति सक्ती थाने भेज दी गई, लेकिन इसके बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

थाने से लेकर SP कार्यालय तक लगा रहे चक्कर

वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि उन्होंने अपने करीब 25 वर्ष के पत्रकारिता जीवन में आम लोगों से जुड़े कई मुद्दे उठाए और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन के सामने उनकी आवाज रखी। अब जब उनकी अपनी बेटी का मामला सामने आया है तो उन्हें स्वयं थाने से लेकर एसडीओपी और एसपी कार्यालय तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

तंबोली ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं है। वह केवल यह जानना चाहते हैं कि शिकायत और काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद मामले में अब तक आगे की कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

15 अगस्त को प्रशस्ति पत्र लौटाने का ऐलान

अनिल तंबोली के अनुसार पुलिस प्रशासन की ओर से जब उन्हें सम्मानित किया गया था, तब उन्होंने इसे गर्व के साथ स्वीकार किया था। हालांकि, अब बेटी की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्होंने 15 अगस्त को सार्वजनिक रूप से प्रशस्ति पत्र और सम्मान वापस करने का निर्णय लिया है।

उनका कहना है कि सम्मान लौटाना उनके लिए आसान फैसला नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वह इसे अपनी मजबूरी मानते हैं।

SP के सामने रखे दो सवाल

तंबोली ने सक्ती पुलिस अधीक्षक प्रफ्फुल कुमार ठाकुर के सामने दो सवाल भी रखे हैं। उनका कहना है कि या तो उन्हें सम्मानित करने के लिए गलत व्यक्ति का चयन किया गया था या फिर सक्ती थाना प्रभारी के रूप में गलत अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है।

उन्होंने एसपी से पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए शिकायत की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

पुलिस प्रशासन का पक्ष आना बाकी

इस पूरे मामले में दहेज और मानसिक प्रताड़ना तथा एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने संबंधी बातें अनिल तंबोली की ओर से लगाए गए आरोप और दावे हैं। फिलहाल पुलिस प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। पुलिस का पक्ष मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत पर अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

वरिष्ठ पत्रकार द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान लौटाने की घोषणा के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। अब निगाहें पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया और बेटी की शिकायत पर होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।