जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में 5वीं वाहिनी कर्मचारी कल्याण साख समिति से जुड़े करीब 3 करोड़ रुपये के कथित गबन मामले में पुलिस ने दूसरी बड़ी कार्रवाई की है। परपा पुलिस ने प्रधान आरक्षक संजय चौहान को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। इससे पहले समिति के तत्कालीन अध्यक्ष और प्रधान आरक्षक शिवकांत तिवारी को गिरफ्तार किया जा चुका है।
2012 से 2021 तक के रिकॉर्ड की जांच
पुलिस के मुताबिक, मामला जगदलपुर के कंगोली स्थित 5वीं वाहिनी कर्मचारी कल्याण साख समिति से जुड़ा है। शिकायत में आरोप है कि वर्ष 2012 से 2021 के बीच लोन खातों और कर्मचारियों की जमा राशि में वित्तीय गड़बड़ी की गई।
आरोप है कि वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों में हेरफेर कर करीब 3 करोड़ रुपये का कथित गबन किया गया। शिकायत के बाद परपा थाने में मामला दर्ज कर पुराने खातों, लोन रिकॉर्ड, जमा राशि और दूसरे वित्तीय दस्तावेजों की जांच शुरू की गई।
पूछताछ के बाद संजय चौहान की गिरफ्तारी
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने समिति के वित्तीय कामकाज से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की। इसी क्रम में प्रधान आरक्षक संजय चौहान से भी पूछताछ की गई।
पुलिस के अनुसार, संजय चौहान समिति के वित्तीय मामलों से जुड़े रहे हैं और तत्कालीन अध्यक्ष शिवकांत तिवारी के सहयोगी के रूप में भी काम कर चुके हैं। पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया।
शिवकांत तिवारी की पहले हो चुकी गिरफ्तारी
इस मामले में पहली गिरफ्तारी 29 जुलाई को हुई थी। पुलिस ने समिति के तत्कालीन अध्यक्ष और प्रधान आरक्षक शिवकांत तिवारी को गिरफ्तार किया था।
उनकी गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए समिति से जुड़े दूसरे कर्मचारियों और पुराने वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल शुरू की गई।
परिवार ने निष्पक्ष जांच की उठाई थी मांग
शिवकांत तिवारी की गिरफ्तारी के बाद उनके परिवार ने उन्हें निर्दोष बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। परिजनों का कहना था कि समिति का काम कई कर्मचारियों के जरिए संचालित होता था, इसलिए सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
3 करोड़ रुपये कहां गए, पुलिस कर रही जांच
बस्तर एसपी शलभ कुमार सिन्हा के मुताबिक, मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस लोन खातों, कर्मचारियों की जमा राशि, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपये की हेराफेरी कैसे हुई, रकम किन खातों से निकाली या ट्रांसफर की गई और इसमें कितने लोगों की भूमिका रही।
पुलिस का कहना है कि जांच में किसी अन्य व्यक्ति या कर्मचारी की संलिप्तता के सबूत मिलने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।





