रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदोन्नति में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर विवाद तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने शिक्षा विभाग की हालिया बैठक में लिए गए निर्णयों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वर्तमान शिक्षक भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में प्रमोशन के लिए TET की अनिवार्यता का प्रावधान नहीं है। ऐसे में TET के आधार पर पदोन्नति रोकना उचित नहीं होगा।

'मौजूदा नियमों में प्रमोशन के लिए TET अनिवार्य नहीं'

संजय शर्मा के मुताबिक, प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षक और मिडिल स्कूलों के शिक्षक लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षकों को उम्मीद थी कि विभाग इस दिशा में ठोस निर्णय लेते हुए विभागीय TET परीक्षा आयोजित करने की पहल करेगा।

एसोसिएशन का दावा है कि वर्तमान में लागू भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में पदोन्नति के लिए TET पास करने की बाध्यता नहीं है। ऐसे में विभागीय स्तर पर इसे अनिवार्य किए जाने से नियमों और निर्देशों के बीच विरोधाभास की स्थिति बन सकती है।

2028 तक समय तो पहले प्रमोशन क्यों रोका जाए?

एसोसिएशन ने कहा कि शिक्षकों को TET उत्तीर्ण करने के लिए वर्ष 2028 तक का समय दिए जाने की बात है। ऐसी स्थिति में वर्ष 2028 से पहले होने वाली पदोन्नति में TET को आधार बनाकर वरिष्ठ शिक्षकों को प्रमोशन से वंचित करना उचित नहीं है।

संगठन का कहना है कि ऐसा होने पर भविष्य में कानूनी विवाद और न्यायालय में प्रकरण पहुंचने की स्थिति भी बन सकती है।

सीनियरिटी के आधार पर प्रमोशन की मांग

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि शिक्षकों की सेवा वरिष्ठता सूची के आधार पर लंबित पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। साथ ही संबंधित शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर TET उत्तीर्ण करने का अवसर दिया जाए।

संगठन ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) से विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने की भी मांग की है, ताकि पात्र शिक्षक परीक्षा में शामिल होकर आवश्यक योग्यता पूरी कर सकें।

एसोसिएशन ने दी विरोध की चेतावनी

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि मौजूदा नियमों से अलग व्यवस्था बनाकर शिक्षकों के पदोन्नति अधिकार प्रभावित किए जाते हैं तो इसका प्रदेश स्तर पर विरोध किया जाएगा।

संगठन ने शिक्षा विभाग से नियमों को लेकर बनी स्थिति स्पष्ट करने और विसंगतियों को दूर करते हुए वरिष्ठता क्रम के आधार पर जल्द पदोन्नति आदेश जारी करने की मांग की है।