नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देशभर में भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने अब पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और झारखंड समेत कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर संबंधित शिक्षा मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी है।
प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि यदि केंद्र स्तर पर जवाबदेही तय हो सकती है, तो राज्यों में भी भर्ती घोटालों और पेपर लीक मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
पंजाब में भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद
पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती और कृषि विकास अधिकारी (ADO) भर्ती परीक्षा कथित अनियमितताओं को लेकर विवादों में घिर गई है।
बताया जा रहा है कि फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के दौरान पुलिस और जांच एजेंसियों ने कई परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी कर हाईटेक नकल गिरोह का खुलासा किया। जांच में अभ्यर्थियों के पास ब्लूटूथ डिवाइस, वायरलेस ईयरपीस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिलने का दावा किया गया। आरोप है कि प्रश्नपत्र की जानकारी बाहर भेजने के लिए तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
इस मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं ADO भर्ती परीक्षा में भी प्रश्नपत्र लीक और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए हैं। विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की है।
आंध्र प्रदेश में 'मेगा DSC-2025' पर सवाल
आंध्र प्रदेश में मेगा DSC-2025 शिक्षक भर्ती परीक्षा भी विवादों में है। विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा संचालन और प्रश्नपत्र तैयार करने से जुड़ी जिम्मेदारियां एक ही एजेंसी को सौंपे जाने से निष्पक्षता प्रभावित हुई। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में गोपनीयता के उल्लंघन और संदिग्ध तरीके से रैंक हासिल करने के भी आरोप लगाए गए हैं। पार्टी ने दावा किया है कि उसने मामले से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य राज्यपाल को सौंपे हैं।
अन्य राज्यों में भी बढ़ा राजनीतिक दबाव
पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर तेलंगाना, कर्नाटक और झारखंड में भी विपक्ष और छात्र संगठन सरकारों को घेर रहे हैं। विभिन्न संगठनों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।
युवाओं में बढ़ रहा आक्रोश
देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती विवादों ने लाखों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ा दी है। छात्र संगठनों का कहना है कि बार-बार होने वाली अनियमितताओं से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
नोट: विभिन्न राज्यों में लगाए गए आरोपों की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। कई मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है तथा अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।




