रायपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया जा रहा है। सलाखों के बीच भाई-बहन के अटूट रिश्ते की भावुक तस्वीर देखने को मिली। बहनों ने जेल में बंद अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ, सुरक्षित और सुखी जीवन की कामना की। वहीं भाइयों ने भी बहनों की रक्षा और जीवन में सही मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के मुताबिक प्रदेश की 5 केंद्रीय जेलों, 22 जिला जेलों और 6 उप जेलों में रक्षाबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। जेल परिसरों में पर्व को सद्भाव और गरिमामय माहौल में मनाया जा रहा है।

तिलक और आरती के साथ बहनों का स्वागत

जेलों में पहुंचीं बहनों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। तिलक, अक्षत और आरती के साथ रक्षाबंधन की रस्म पूरी की गई। जेल प्रशासन की ओर से पूजा सामग्री और मिठाई की भी व्यवस्था की गई है।

रक्षाबंधन के दौरान कई भावुक पल भी देखने को मिले। लंबे समय बाद अपने भाइयों से मिलने पहुंचीं बहनों ने उनकी कलाई पर राखी बांधी और बेहतर भविष्य की कामना की। जेल की सलाखें भी भाई-बहन के स्नेह और भावनाओं के बीच बाधा नहीं बन सकीं।

परिजनों के लिए विशेष इंतजाम

रक्षाबंधन पर जेलों में आने वाले परिजनों को परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। जेल परिसरों में प्रतीक्षालय, पेयजल और सहायता काउंटर की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

बंदियों को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल

जेल प्रशासन का मानना है कि ऐसे सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजन बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परिवार से जुड़ाव उन्हें मानसिक शांति देने के साथ समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करता है।

डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने कहा कि सनातन परंपराओं से जुड़े पर्व बंदियों में नैतिक मूल्यों और सकारात्मक सोच का संचार करते हैं। रक्षाबंधन का यह अवसर संदेश देता है कि भाई-बहन के रिश्ते और रक्षा-सूत्र की डोर सलाखों की सीमाओं से भी कहीं अधिक मजबूत है।