राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में कथित गोलीबारी की घटना के बाद जब्त किए गए हथियार की पहचान को लेकर पुलिस अधिकारियों के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। जानकारी के मुताबिक, कोतवाली थाना पुलिस ने बरामद हथियार को पिस्टल बताया है, जबकि नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) सत्यप्रकाश तिवारी ने इसे एयरगन कहा है। अधिकारियों के कथित विरोधाभासी बयानों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और हथियार की वास्तविक पहचान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोतवाली पुलिस ने बताया पिस्टल, सीएसपी ने कहा एयरगन

जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव में कथित गोलीबारी की घटना सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान एक हथियार जब्त किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, हथियार की पहचान को लेकर पुलिस अधिकारियों की ओर से अलग-अलग जानकारी दिए जाने से मामला चर्चा में आ गया है।

बताया जा रहा है कि कोतवाली पुलिस ने जब्त हथियार को पिस्टल बताया, जबकि सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने उसे एयरगन कहा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर पुलिस की कार्रवाई में बरामद हथियार की वास्तविक पहचान क्या है।

पीड़ित की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

मामले में पीड़ित की ओर से पुलिस को शिकायत दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों, घटना की परिस्थितियों और दर्ज प्रकरण की धाराओं के संबंध में विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

पुलिस अधिकारियों के बयानों में अंतर सामने आने के बाद जांच के दौरान सूचनाओं के आदान-प्रदान और विभागीय समन्वय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

पिस्टल और एयरगन में अंतर, तकनीकी जांच से होगी पहचान

विशेषज्ञों के अनुसार, पिस्टल और एयरगन की कार्यप्रणाली अलग-अलग होती है। सामान्य तौर पर पिस्टल में कारतूस की सहायता से गोली चलाई जाती है, जबकि एयरगन में संपीड़ित हवा या गैस के दबाव से छर्रा या अन्य प्रोजेक्टाइल छोड़ा जाता है।

ऐसे में जब्त हथियार की तकनीकी और फोरेंसिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद हथियार किस श्रेणी का है और उसकी वास्तविक कार्यप्रणाली क्या है।

पुलिस की जांच प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल

हथियार की पहचान को लेकर सामने आए कथित विरोधाभासी बयानों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, केवल अधिकारियों के बयानों में अंतर होने से जांच में लापरवाही या प्रशिक्षण की कमी साबित नहीं होती।

अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि अधिकारियों ने अलग-अलग जानकारी किस आधार पर दी और क्या हथियार की तकनीकी जांच पूरी होने से पहले ही बयान सामने आ गए थे।

आधिकारिक रिपोर्ट से साफ होगी स्थिति

फिलहाल मामले में जब्त हथियार की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट या पुलिस की अंतिम आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है कि बरामद हथियार पिस्टल है या एयरगन।

अब पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट और तकनीकी जांच के निष्कर्ष का इंतजार है। इसके बाद ही हथियार की वास्तविक पहचान और कथित गोलीबारी की घटना से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।