राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में ग्रामीणों को रेल फाटक पर लगने वाले जाम से राहत देने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए बरगा और आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए। तेज बारिश के बाद दोनों पुलों पर सड़क धंसने, डामर उखड़ने और लंबी दरारें आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है।

बरगा ओवरब्रिज की सबसे खराब स्थिति

ग्रामीणों के अनुसार करीब दो माह पहले शुरू हुए बरगा रेलवे ओवरब्रिज पर लगभग 100 मीटर लंबे हिस्से में दरारें दिखाई दे रही हैं। कई स्थानों पर सड़क करीब सात फीट तक धंस गई है, जबकि 10 से 15 फीट तक डामर उखड़ गया है। इससे आवागमन प्रभावित हो रहा है और दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई है।

आलीवारा ओवरब्रिज पर भी बारिश का असर

करीब एक माह पहले शुरू हुए आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच रोड समेत कई हिस्सों में चौड़ी दरारें उभर आई हैं और सड़क बैठने लगी है। स्थिति बिगड़ने के बाद रेलवे ने मरम्मत कार्य शुरू कराया, लेकिन ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए दोषपूर्ण हिस्से का नए सिरे से निर्माण कराने की मांग की है।

निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों और तकनीकी नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि पहली ही बारिश में पुलों की ऐसी स्थिति निर्माण एजेंसी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

यह पहली बार नहीं है कि रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण पर सवाल उठे हों। इससे पहले मनगटा-मुढ़ीपार रेलवे ओवरब्रिज में भी निर्माण के कुछ समय बाद दरारें आने का मामला सामने आया था। उस समय रेलवे को मरम्मत करानी पड़ी थी और यह मुद्दा विधानसभा तक पहुंचा था। अब बरगा और आलीवारा ओवरब्रिज में सामने आई खामियों के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।

स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग

ग्रामीणों ने कहा है कि केवल मरम्मत कराकर मामले को खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूरी परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने, निर्माण एजेंसी और गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा आवश्यकता पड़ने पर क्षतिग्रस्त हिस्सों का नए सिरे से निर्माण कराने की मांग की है।

मामले की जानकारी मिलने पर रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे। सीनियर सेक्शन इंजीनियर ए.के. मौर्य ने बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचने के लिए विशेषज्ञों से विस्तृत तकनीकी जांच कराना बेहद जरूरी है।