रायपुर/नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और झीरम घाटी हमले से प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। बैठक में झीरम मामले में हाल ही में आए विशेष NIA अदालत के फैसले, आगे की कानूनी प्रक्रिया और पीड़ित परिवारों की मांगों पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों से संवाद किया और कहा कि न्याय की लड़ाई को आगे जारी रखा जाएगा। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, उन्होंने परिवारों से पीछे नहीं हटने और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कही।
कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
मुलाकात में छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत, पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
पीड़ित और प्रभावित परिवारों की ओर से उमेश पटेल, अनिता योगेंद्र शर्मा, जितेंद्र मुदलियार, शिव सिंह ठाकुर, छविंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैन्दू समेत अन्य प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया।
आगे की कानूनी रणनीति पर हुई चर्चा
बैठक का प्रमुख मुद्दा हाल ही में विशेष NIA अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले के बाद आगे की कानूनी रणनीति रहा। 16 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने झीरम घाटी हमले से जुड़े 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
इस फैसले के बाद पीड़ित परिवारों और कांग्रेस नेताओं ने मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करने की बात कही थी। 26 सितंबर की यह मुलाकात उसी क्रम में हुई।
हमले से पहले की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा
बैठक में 2013 की कांग्रेस परिवर्तन यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा भी उठा। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, राहुल गांधी ने हमले से पहले अलग-अलग चरणों में उपलब्ध कराई गई सुरक्षा का पूरा विवरण जुटाने को कहा है। पार्टी इस बात की जानकारी एकत्र करने की तैयारी कर रही है कि यात्रा के विभिन्न पड़ावों, खासकर झीरम हमले से पहले, सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी।
भूपेश बघेल ने कही लड़ाई आगे ले जाने की बात
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बैठक के बाद कहा कि झीरम घटना से जुड़े मुद्दों, जांच प्रक्रिया और आगे की लड़ाई पर राहुल गांधी के साथ चर्चा हुई। उन्होंने भाजपा और जांच एजेंसियों पर आरोप भी लगाए; ये कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्षों की अलग स्थिति रही है।
कांग्रेस का कहना है कि अदालत के फैसले के बावजूद वह मामले से जुड़े अन्य सवालों और संभावित कानूनी विकल्पों को आगे उठाती रहेगी।
2013 में हुआ था झीरम घाटी हमला
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। सितंबर 2026 में विशेष NIA अदालत ने मामले के 10 आरोपियों को दोषी ठहराया और बाद में उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई।
झीरम मामला पिछले 13 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। अब पीड़ित परिवार और कांग्रेस नेतृत्व अदालत के हालिया फैसले के बाद आगे की कानूनी दिशा पर विचार कर रहे हैं।





