बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में कहा है कि पति पर उसके बीमार माता-पिता से अलग रहने के लिए लगातार दबाव बनाना परिस्थितियों के आधार पर मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि शादी के बाद पति-पत्नी अपना परिवार बनाते हैं, लेकिन इससे बुजुर्ग और बीमार माता-पिता के प्रति संतान की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।

जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने डोंगरगढ़ फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी। फैमिली कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर पति की तलाक याचिका मंजूर की थी।

2007 में हुई थी शादी, डेढ़ साल बाद शुरू हुआ विवाद

मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ का है। युवक की शादी 8 मार्च 2007 को पत्थलगांव की रहने वाली महिला से हुई थी। शादी के करीब डेढ़ साल बाद दोनों के बीच पारिवारिक विवाद शुरू हो गया।

पति ने कोर्ट में बताया कि उसके पिता की तीन बार हार्ट सर्जरी हो चुकी थी। इसके बावजूद पत्नी कथित तौर पर उस पर माता-पिता से अलग होकर रहने का दबाव बनाती थी। पति के मुताबिक, जब उसने अलग रहने से इनकार किया तो पारिवारिक विवाद बढ़ता गया।

रिश्तेदारों ने भी कराई थी सुलह

वर्ष 2018 में रिश्तेदारों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की गई। इस दौरान पत्नी की ओर से लिखित माफीनामा भी दिया गया, लेकिन इसके बाद भी दोनों के बीच विवाद समाप्त नहीं हुआ।

इसके बाद पति ने डोंगरगढ़ फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका लगाई। 11 नवंबर 2024 को फैमिली कोर्ट ने क्रूरता को आधार मानते हुए तलाक मंजूर कर दिया। पत्नी ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

पत्नी ने लगाए प्रताड़ना और 50 लाख मांगने के आरोप

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पत्नी ने पति और सास पर प्रताड़ना के आरोप लगाए। उसने यह भी दावा किया कि पेट्रोल पंप खोलने के लिए मायके से 50 लाख रुपए लाने की मांग की गई थी।

हालांकि, कोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और गवाहों के बयान देखने के बाद इन आरोपों को प्रमाणित नहीं माना।

हाई कोर्ट ने कहा- माता-पिता की देखभाल भी जिम्मेदारी

हाई कोर्ट ने कहा कि बीमार और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना संतान की जिम्मेदारी है। ऐसे में बिना पर्याप्त कारण पति पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने का लगातार दबाव बनाना उसके लिए मानसिक प्रताड़ना की स्थिति पैदा कर सकता है।

इसी आधार पर हाई कोर्ट ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए डोंगरगढ़ फैमिली कोर्ट से मंजूर तलाक को बरकरार रखा।