रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आयोजन के खर्च और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कार्यक्रम का बचाव करते हुए इसे सेवा, सामाजिक सहभागिता और जनभागीदारी से जुड़ा अभियान बताया है।


भूपेश बघेल ने खर्च को लेकर उठाए सवाल

‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर दीप प्रज्ज्वलन के लिए खर्च किस मद से किया जा रहा है और इसमें सरकारी संसाधनों की क्या भूमिका है। भूपेश बघेल ने भी आयोजन के खर्च को लेकर जवाब मांगा है। भाजपा इसे ‘सेवा संकल्प अभियान’ और जनभागीदारी से जुड़ी पहल बता रही है।


मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कार्यक्रम का किया बचाव

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों को सेवा और जनभागीदारी से जोड़ने का अवसर बताया है। उन्होंने लोगों से अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाकर अभियान में सहभागी बनने की अपील भी की थी।

राजवाड़े के मुताबिक, दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से सेवा, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों को सेवा, जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए अभियान की उपयोगिता बताई।


सूरजपुर में भी लाखों दीप जलाने का कार्यक्रम

सूरजपुर जिले में अभियान के तहत 4 लाख 11 हजार 111 दीप प्रज्ज्वलित करने की योजना बनाई गई थी। जिला स्तरीय कार्यक्रम में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की सहभागिता भी तय की गई थी। प्रदेश के अन्य जिलों में भी अलग-अलग संख्या में दीप जलाने के कार्यक्रम आयोजित किए गए।


सरकार ने बताया जनभागीदारी का अभियान

प्रदेश सरकार की ओर से ‘आशीर्वाद का दीया’ को 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत से जोड़ा गया है। 17 सितंबर की शाम प्रदेशभर में सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अपने निवास पर दीप जलाया और प्रधानमंत्री मोदी के स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना की।

इस कार्यक्रम को लेकर सत्ता पक्ष इसे सेवा और जनभागीदारी का अभियान बता रहा है, जबकि विपक्ष खर्च और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल उठा रहा है। इसी को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।