रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्य कर विभाग ने वर्ष 2022 में लिपिक वर्ग से वाणिज्यिक कर निरीक्षक पद पर नियुक्ति के लिए आयोजित सीमित प्रतियोगी परीक्षा को शून्य घोषित करते हुए निरस्त कर दिया है। विभागीय जांच में आरक्षण रोस्टर, उपस्थिति पंजी, अंक तालिका, उत्तर-पुस्तिकाओं की कोडिंग और पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
1 जुलाई 2022 का नियुक्ति आदेश भी रद्द
जांच में चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं में एक जैसे उत्तर लिखे जाने की बात भी सामने आई। इसके बाद परीक्षा के आधार पर 1 जुलाई 2022 को जारी नियुक्ति आदेश भी निरस्त कर दिया गया है। आदेश के अनुसार प्रभावित कर्मचारियों को उनके मूल पद और मूल पदस्थापना पर वापस लौटना होगा। यह आदेश आयुक्त राज्य कर की ओर से 11 सितंबर 2026 को जारी किया गया।
जांच में कई स्तर पर गड़बड़ियों का उल्लेख
विभागीय जांच में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए। इनमें आरक्षण रोस्टर के पालन, उपस्थिति रिकॉर्ड, अंक तालिका, उत्तर-पुस्तिकाओं की कोडिंग और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शामिल है। इन निष्कर्षों के आधार पर परीक्षा को वैध नहीं मानते हुए पूरी प्रक्रिया रद्द की गई।
डिप्टी CM अरुण साव ने कार्रवाई को बताया जीरो टॉलरेंस नीति
डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव ने परीक्षा निरस्त किए जाने को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से जोड़ते हुए कहा कि जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साव ने इस मामले को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से भी जोड़ा और गंभीर आरोप लगाए।
PCC चीफ दीपक बैज ने सरकार पर उठाए सवाल
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पदोन्नति या परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो सरकार जांच कर सकती है। साथ ही उन्होंने सरकार पर मामले में देर से कार्रवाई करने और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए।
परीक्षा निरस्त होने के बाद अब प्रभावित कर्मचारियों को मूल पदों पर लौटना होगा। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे सामने रख रहे हैं।





