छत्तीसगढ़ में NEET UG 2026 के परिणाम घोषित होने के बाद मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली काउंसलिंग में इस बार भी पिछले वर्षों की तरह पहले सीट आवंटित की जाएगी और उसके बाद अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने फिलहाल काउंसलिंग प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, राज्य में पिछले कई वर्षों से यही व्यवस्था लागू है। ऑनलाइन काउंसलिंग के दौरान पहले अभ्यर्थियों को उनकी रैंक और विकल्पों के आधार पर कॉलेज एवं सीट आवंटित की जाती है। इसके बाद प्रवेश प्रक्रिया के दौरान उनके मूल दस्तावेजों की जांच (स्क्रूटनी) की जाती है। यदि सत्यापन के समय किसी अभ्यर्थी के दस्तावेज गलत, अपूर्ण या अमान्य पाए जाते हैं, तो उसकी आवंटित सीट रद्द की जा सकती है।

पहले सीट आवंटन, फिर दस्तावेजों का सत्यापन

पहले काउंसलिंग प्रक्रिया में अनंतिम मेरिट सूची जारी होने के बाद दावा-आपत्ति आमंत्रित की जाती थी और उनके निराकरण के बाद अंतिम मेरिट सूची प्रकाशित होती थी। हालांकि करीब पांच वर्ष पहले इस व्यवस्था में बदलाव किया गया। अब दावा-आपत्ति की प्रक्रिया समाप्त कर सीधे सीट आवंटन किया जाता है और उसके बाद दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से काउंसलिंग प्रक्रिया तेज होती है, लेकिन यदि किसी उम्मीदवार के दस्तावेज बाद में अमान्य पाए जाते हैं तो उसकी सीट निरस्त होने की संभावना बनी रहती है।

अगस्त के अंत या सितंबर में शुरू हो सकती है काउंसलिंग

इस वर्ष NEET UG 2026 परीक्षा और परिणाम में हुई देरी का असर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया पर भी पड़ा है। ऐसे में काउंसलिंग अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर माह में शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इसके कारण नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में भी विलंब हो सकता है।

पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत

मेडिकल शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवेश प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने के लिए काउंसलिंग व्यवस्था में तकनीक आधारित सुधार किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि इससे विवादों और अनियमितताओं की संभावना कम होगी तथा पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।

प्रदेश में 2,330 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 10 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जहां एमबीबीएस की कुल 2,330 सीटें उपलब्ध हैं। इस वर्ष प्रदेश के 45 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने NEET UG परीक्षा दी है और अब सभी की नजरें काउंसलिंग कार्यक्रम पर टिकी हैं।

काउंसलिंग शुरू होने के बाद अभ्यर्थियों को अपनी रैंक के अनुसार मेडिकल कॉलेज और पाठ्यक्रम चुनने का अवसर मिलेगा। हालांकि प्रवेश के समय सभी मूल दस्तावेजों का सही और पूर्ण होना अनिवार्य होगा, क्योंकि किसी भी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर आवंटित सीट रद्द की जा सकती है।