नई दिल्ली। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से भारतीय हथकरघा उत्पादों और पारंपरिक वस्त्रों को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने लोगों से कहा कि वे स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए कपड़े पहनें और सोशल मीडिया पर #NationalHandloomDay के साथ 'गेट रेडी विद मी (GRWM)' वीडियो या तस्वीरें साझा करें, ताकि भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा को वैश्विक पहचान मिल सके।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा संदेश में कहा कि भारत की हथकरघा विविधता हमारी सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों को पहनकर वीडियो और तस्वीरें पोस्ट करें और इस अभियान को जनभागीदारी का रूप दें।
राष्ट्रपति भवन में होगा राष्ट्रीय समारोह
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर कपड़ा मंत्रालय नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह का आयोजन करेगा। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि होंगी। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, कपड़ा सचिव नीलम शमी राव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार होंगे प्रदान
समारोह में वर्ष 2025 के संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। कुल 22 पुरस्कारों में तीन संत कबीर पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं। इन पुरस्कारों के जरिए उत्कृष्ट शिल्प कौशल, नवाचार और पारंपरिक बुनाई को संरक्षित रखने वाले बुनकरों को सम्मानित किया जाएगा।
प्रदर्शनी और स्मारक डाक टिकट भी होंगे जारी
कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार प्राप्त हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही पारंपरिक कानी बुनाई और अन्य हस्तनिर्मित वस्त्रों का जीवंत प्रदर्शन भी होगा। इस अवसर पर भारत की विभिन्न हथकरघा परंपराओं पर आधारित चार स्मारक डाक टिकट जारी किए जाएंगे। इसके अलावा "अर्थ. रूट. थ्रेड – सेंट्रल इंडिया के ऑल डाई हैंडलूम टेक्सटाइल्स" और हथकरघा पुरस्कार पुस्तक-2025 का भी विमोचन किया जाएगा।
35 लाख से अधिक लोगों की आजीविका का आधार
कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, भारत का हथकरघा क्षेत्र 35 लाख से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, जिनमें 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। यह क्षेत्र न केवल देश की समृद्ध वस्त्र परंपरा को संरक्षित करता है, बल्कि पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रणाली को भी बढ़ावा देता है।
स्वदेशी आंदोलन की याद में मनाया जाता है दिवस
हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। यह दिन वर्ष 1905 में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है, जिसने देश में स्वदेशी उद्योगों और हथकरघा क्षेत्र को नई दिशा दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में चेन्नई से इस दिवस की शुरुआत की थी।
गुजरात के हथकरघा उत्पादों की बढ़ी वैश्विक पहचान
गुजरात सरकार के अनुसार, राज्य की पारंपरिक पटोला और कच्छ बुनाई को अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया और मध्य पूर्व सहित कई देशों में पहचान मिली है। आधुनिक डिजाइन, सरकारी सहयोग और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण यह क्षेत्र 12 हजार से अधिक बुनकरों और कारीगरों को रोजगार दे रहा है तथा 51 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुका है।





