अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना दिया है। इन खबरों के बीच शेयर बाजार, कमोडिटी मार्केट और बुलियन सेक्टर में हल्की तेजी देखने को मिली है। साथ ही यह चर्चा भी तेज है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक होर्मूज जलडमरूमध्य जल्द सामान्य रूप से संचालित हो सकता है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को राहत मिलने की उम्मीद है। इन संकेतों के चलते कई निवेशक बाजार में बड़े उछाल की संभावना देख रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में अत्यधिक उत्साहित होने से बचना चाहिए। चार्टर्ड अकाउंटेंट ममता चौधरी का कहना है कि अभी वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पूरी तरह स्थिर नहीं हुए हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते की संभावना जताई गई है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पक्षों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। विशेष रूप से इजरायल का रुख अब भी सख्त माना जा रहा है, जबकि लेबनान और अन्य पश्चिम एशियाई देशों से जुड़े मुद्दों पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
ममता चौधरी के अनुसार, शांति समझौते को अंतिम रूप देने और उस पर औपचारिक हस्ताक्षर होने में अभी लगभग 60 दिनों का समय लग सकता है। ऐसे में यह मान लेना कि बाजार में अब केवल तेजी ही आएगी, जल्दबाजी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी नकारात्मक घटनाक्रम, सैन्य तनाव या राजनीतिक बयान का सीधा असर बाजारों पर पड़ सकता है। वर्तमान में निवेशकों की भावनाएं काफी सकारात्मक हैं, लेकिन यही उत्साह किसी प्रतिकूल खबर के आने पर तेज गिरावट में भी बदल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार, सोना-चांदी और अन्य निवेश साधनों में निवेश करते समय केवल खबरों या अफवाहों के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए। निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक संकेतकों और बाजार की वास्तविक स्थिति का आकलन करते हुए संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। फिलहाल बाजार में उम्मीदों का माहौल जरूर है, लेकिन अनिश्चितता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, इसलिए सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।





