छह थाना क्षेत्रों में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, पांच से 15 हजार रुपये के कमीशन पर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे बैंक खाते, मोबाइल और बैंक दस्तावेज जब्त
दुर्ग, 22 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी से जुड़े एक नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर जालसाजों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन धोखाधड़ी से हासिल रकम के लेन-देन में किया जाता था।
छह थाना क्षेत्रों में एक साथ दबिश
साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए दुर्ग पुलिस ने 21 अक्टूबर को विशेष अभियान चलाया। इस दौरान नेवई, पुरानी भिलाई, भिलाई भट्ठी, भिलाई नगर, सुपेला और खुर्सीपार थाना क्षेत्रों में संदिग्ध बैंक खाताधारकों की पहचान कर कार्रवाई की गई।
पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों तथा बैंक खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन की पड़ताल की। इसके आधार पर अलग-अलग स्थानों से कुल 13 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।
कमीशन के लालच में साइबर ठगों को सौंपते थे खाते
जांच में सामने आया है कि आरोपी पांच हजार से 15 हजार रुपये तक के कमीशन के बदले बैंक खातों की जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंचाते थे। इसके बाद इन खातों के माध्यम से ऑनलाइन ठगी की रकम का लेन-देन किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, इस तरह के खातों को साइबर अपराध की भाषा में 'म्यूल अकाउंट' कहा जाता है। अपराधी इनका इस्तेमाल ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करने और उसकी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए करते हैं।
इन क्षेत्रों से हुई आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने नेवई थाना क्षेत्र से चार, पुरानी भिलाई से तीन, भिलाई भट्ठी से एक, भिलाई नगर से दो, सुपेला से दो और खुर्सीपार क्षेत्र से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों में प्रेक्षित कामड़े, सत्यवान नायक, रैय्या माधव राव, रमेश कुमार कुर्रे, विनोद कश्यप, भावेश उइके, ऋषभ यादव, कुलेश्वर ठाकुर, गगनदीप सिंह, अनिश अग्रवाल, आनंद शंकर, नितिन वालेचा और हिमांशु गोडांने उर्फ कालू शामिल हैं।
कई बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन की जानकारी
पुलिस की जांच में आरोपियों से जुड़े कई बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली है। कार्रवाई के दौरान मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक सहित अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
पुलिस अब जब्त दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी की रकम किन लोगों तक पहुंचाई गई और इस नेटवर्क से कितने अन्य लोग जुड़े हुए हैं।
साइबर अपराध में बैंक खाता उपलब्ध कराना भी पड़ सकता है भारी
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी अनजान व्यक्ति को पैसे के लालच में अपना बैंक खाता या उससे संबंधित दस्तावेज न दें। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी में होने पर खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है।
पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के संपर्कों और बैंक खातों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।





