नई दिल्ली। आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय कई बार करदाता से आय, निवेश, बैंक खाते, टीडीएस या अन्य जानकारियों को दर्ज करने में गलती हो जाती है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर विभाग करदाताओं को अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर देता है। इसके लिए रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return) और आईटीआर-यू (ITR-U) जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि रिटर्न दाखिल करने के बाद किसी प्रकार की त्रुटि का पता चलता है, तो निर्धारित नियमों के तहत उसे सुधारा जा सकता है। हालांकि इसके लिए समयसीमा और प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है।
क्या है Revised Return?
यदि किसी करदाता ने समय पर अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर दिया है, लेकिन बाद में उसे कोई गलती, छूटी हुई जानकारी या गलत आंकड़ा दिखाई देता है, तो वह Revised Return दाखिल कर सकता है।
रिवाइज्ड रिटर्न के माध्यम से आय, कटौतियां, टैक्स भुगतान, बैंक विवरण या अन्य जानकारियों में सुधार किया जा सकता है। संशोधित रिटर्न दाखिल करने के बाद नया रिटर्न ही अंतिम और मान्य माना जाता है।
कब तक दाखिल कर सकते हैं Revised Return?
आयकर अधिनियम के अनुसार करदाता संबंधित आकलन वर्ष की निर्धारित समयसीमा तक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है। यदि विभाग द्वारा रिटर्न का आकलन पूरा नहीं हुआ है, तो निर्धारित अवधि के भीतर संशोधन की अनुमति रहती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गलती का पता चलते ही जल्द से जल्द संशोधित रिटर्न दाखिल कर देना चाहिए, ताकि बाद में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
क्या है ITR-U?
आईटीआर-यू यानी Updated Income Tax Return ऐसी सुविधा है, जिसके माध्यम से करदाता पहले से दाखिल रिटर्न में छूटी हुई आय या अन्य जानकारी को अपडेट कर सकता है। यह उन लोगों के लिए भी उपयोगी है जिन्होंने निर्धारित समय में रिटर्न दाखिल नहीं किया हो या बाद में कोई अतिरिक्त आय घोषित करना चाहते हों।
हालांकि ITR-U का उपयोग टैक्स रिफंड बढ़ाने या कर देनदारी कम करने के लिए नहीं किया जा सकता। इसका उद्देश्य केवल सही आय की जानकारी देकर कर अनुपालन को बेहतर बनाना है।
ITR-U दाखिल करने के नियम
- करदाता अतिरिक्त आय घोषित कर सकता है।
- अतिरिक्त कर और लागू ब्याज का भुगतान करना होगा।
- रिफंड बढ़ाने के लिए ITR-U दाखिल नहीं किया जा सकता।
- पहले से घोषित आय को कम करने के लिए भी इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
- निर्धारित अतिरिक्त कर (Additional Tax) का भुगतान अनिवार्य होता है।
Revised Return दाखिल करने की प्रक्रिया
- आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर लॉगिन करें।
- ‘File Income Tax Return’ विकल्प चुनें।
- संबंधित आकलन वर्ष का चयन करें।
- ‘Revised Return’ विकल्प पर क्लिक करें।
- आवश्यक संशोधन कर सही जानकारी भरें।
- रिटर्न जमा कर ई-वेरिफिकेशन पूरा करें।
किन बातों का रखें ध्यान?
कर विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण (AIS), टीडीएस विवरण, बैंक खाते और निवेश संबंधी दस्तावेजों का मिलान अवश्य कर लेना चाहिए। इससे त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है और बाद में संशोधन की आवश्यकता नहीं पड़ती।
यदि रिटर्न में कोई गलती हो भी जाए, तो Revised Return और ITR-U जैसी व्यवस्थाएं करदाताओं को उसे सुधारने का अवसर देती हैं। इसलिए समयसीमा के भीतर सही प्रक्रिया अपनाकर अपनी कर संबंधी जानकारी को अद्यतन रखना बेहद जरूरी है।





