नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार, 18 अगस्त को केंद्र की मोदी सरकार पर सोशल मीडिया के जरिए असहमति और विरोध की आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाया। खरगे ने दावा किया कि मार्च से जुलाई 2026 के बीच सरकार की ओर से सोशल मीडिया कंपनियों को करीब 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश जारी किए गए। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है।


पांच महीने में 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश का दावा

खरगे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि केवल पांच महीनों में करीब 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश जारी किए गए, यानी औसतन हर 68 सेकंड में एक आदेश। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, इन कार्रवाइयों का असर छात्रों और उन युवाओं की आवाज पर भी पड़ा, जो परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे थे।

खरगे ने आरोप लगाया कि सड़क पर प्रदर्शन करने वाले युवाओं के समर्थन में सोशल मीडिया पर उठने वाली आवाजों और वीडियो को भी व्यवस्थित तरीके से हटाया जा रहा है।


सोशल मीडिया सेंसरशिप को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की आलोचना करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स, पत्रकारों और आम नागरिकों को पोस्ट हटाए जाने, एफआईआर के नोटिस और धमकियों जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर महिलाओं को निशाना बनाए जाने का मुद्दा भी उठाया। खरगे का आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा महिलाओं की निजी जानकारी सार्वजनिक करने और उन्हें गंभीर धमकियां देने के बावजूद प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती।


पोस्ट हटाने की समय सीमा पर भी सवाल

खरगे ने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से सामग्री हटाने की समय सीमा घटाकर तीन घंटे कर दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे ऑनलाइन सामग्री पर सरकारी नियंत्रण की प्रक्रिया अधिक तेज और स्वचालित हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।


दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में रखा पक्ष

इसी बीच जंतर-मंतर पर कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान अधिकतम संयम बरता गया और केवल आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के कथित रूप से हिंसक होने, बैरिकेड तोड़ने और संसद की ओर बढ़ने का प्रयास करने के बाद स्थिति बिगड़ी थी।


नुकीली लाठियों के इस्तेमाल के आरोप से इनकार

दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने हलफनामे में प्रदर्शन के दौरान नुकीली कीलों वाली लाठियों के इस्तेमाल के आरोपों को भी खारिज किया। पुलिस का कहना है कि इस दावे के समर्थन में पेश किया गया वीडियो एक अकेली रिकॉर्डिंग है।

फिलहाल सोशल मीडिया ब्लॉकिंग को लेकर खरगे की ओर से लगाए गए आंकड़े और आरोप राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं। ये कांग्रेस अध्यक्ष के दावे हैं और केंद्र सरकार का विस्तृत पक्ष सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।