अमेरिका-ईरान युद्धविराम से भारत को राहत, तेल-गैस आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बाद रणनीतिक महत्व वाले होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की संभावना बढ़ गई है। इस घटनाक्रम को वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए राहत भरा माना जा रहा है। समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे भारत सहित कई आयातक देशों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
जानकारों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब चार प्रतिशत की कमी आई है और यह 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। इससे पहले क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलमार्ग?
होर्मुज जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में शामिल है। वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों से आने वाली आपूर्ति की प्रमुख भूमिका है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात से आने वाला तेल इसी मार्ग के जरिए भारत पहुंचता है। इसके अलावा एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति भी काफी हद तक इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर करती है।
तनाव के दौरान बढ़ी थीं चुनौतियां
क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई थी। गैस आपूर्ति में व्यवधान की वजह से कई क्षेत्रों में दबाव बढ़ा और उद्योगों को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से घरेलू ईंधन कीमतों पर भी असर देखने को मिला।
राहत की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्धविराम लंबे समय तक कायम रहता है और होर्मुज मार्ग से आवाजाही पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो भारत को तेल और गैस आयात में राहत मिल सकती है। इससे पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना भी जताई जा रही है।





