रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के कामकाज में परिवार के सदस्यों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब किसी निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन या अन्य करीबी रिश्तेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि अथवा समन्वयक के रूप में नामित या नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इससे संबंधित संशोधन की अधिसूचना छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर दी है। सरकार का कहना है कि महिला जनप्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से अपनी जिम्मेदारियां निभाने का अवसर देने और उनके नाम पर परिजनों के हस्तक्षेप को रोकने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।


2022 के नियमों में सरकार ने किया संशोधन

राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ नगरपालिक (लोकसभा सदस्य, राज्य विधानसभा सदस्य या राज्यसभा सदस्य द्वारा प्रतिनिधि के रूप में नाम निर्देशन हेतु अर्हताएं) नियम, 2022 में संशोधन किया है।

इसके तहत मौजूदा नियम 3 के बाद नया नियम 4 जोड़ा गया है। नए प्रावधान में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के परिवार के सदस्यों को प्रतिनिधि के रूप में नामित किए जाने पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है।

यह संशोधन छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 और छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए किया गया है।


पति, बेटे-बेटी और भाई-बहन समेत करीबी रिश्तेदारों पर रोक

नए नियम के अनुसार, किसी भी नगरीय निकाय में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा किसी अन्य निकट पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि या समन्वयक व्यक्ति के रूप में नियुक्त अथवा नामित नहीं किया जाएगा।

इसका मतलब है कि महिला जनप्रतिनिधि की जगह परिवार का कोई सदस्य आधिकारिक तौर पर प्रतिनिधि बनकर नगरीय निकाय के कामकाज में हिस्सा नहीं ले सकेगा।


परिजनों के हस्तक्षेप की शिकायतों के बाद फैसला

उपमुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने बताया कि लंबे समय से निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के परिवार के सदस्यों के हस्तक्षेप को लेकर शिकायतें मिल रही थीं।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में पति, पुत्र या अन्य रिश्तेदार बैठकों में शामिल होते थे। कुछ मामलों में परिजनों द्वारा दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जाने जैसी शिकायतें भी सामने आई थीं।

इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नियमों में बदलाव कर पारिवारिक सदस्यों को प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने पर रोक लगाने का फैसला लिया है।


नियम के खिलाफ नियुक्ति हुई तो नहीं होगी मान्य

डिप्टी सीएम अरुण साव के मुताबिक, नए नियम लागू होने के बाद यदि किसी महिला जनप्रतिनिधि के करीबी रिश्तेदार को प्रतिनिधि या समन्वयक नियुक्त किया जाता है तो ऐसी नियुक्ति मान्य नहीं होगी

उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन कर नियुक्ति किए जाने पर संबंधित मामले में कार्रवाई भी की जाएगी।


महिला आरक्षण का वास्तविक लाभ दिलाने पर जोर

अरुण साव ने कहा कि नगरीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने का उद्देश्य उन्हें नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया में आगे लाना है। यदि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की जगह उनके परिवार के सदस्य जिम्मेदारियां निभाते हैं तो महिला प्रतिनिधित्व का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है।

सरकार का मानना है कि नए नियम से निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्र भूमिका मजबूत होगी और उन्हें स्थानीय शासन में सीधे निर्णय लेने के अधिक अवसर मिलेंगे।


राजपत्र में अधिसूचना के बाद नियम हुआ स्पष्ट

राजपत्र में संशोधन प्रकाशित होने के साथ सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नगरीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों के नाम पर उनके करीबी परिजनों को परोक्ष प्रतिनिधि या समन्वयक के रूप में काम करने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार ने इस फैसले को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अब नगरीय निकायों में नए प्रावधान का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।