इंदौर। वैश्विक आर्थिक नीतियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते सोना-चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। ट्रंप की टैरिफ नीति, “अमेरिका फर्स्ट” रणनीति, केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार खरीद, ब्याज दरों में कटौती और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कारणों से वर्ष 2025 से कीमती धातुओं में मजबूत तेजी का रुख बना हुआ था।
📈 तेजी से बना रिकॉर्ड स्तर
बुलियन एक्सपर्ट निलेश सारडा के अनुसार, इन वैश्विक परिस्थितियों के चलते सोना और चांदी ने इस वर्ष अब तक ऐतिहासिक ऊंचाई छू ली थी। उन्होंने बताया कि—
- सोना एक समय ₹1,90,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था
- जबकि चांदी ने ₹4,10,000 प्रति किलोग्राम तक का स्तर छू लिया था
⚠️ मार्च के बाद क्यों आई सुस्ती?
मार्च में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया, लेकिन इसके बाद सोना-चांदी में सुस्ती देखने को मिली।
वर्तमान में स्थिति यह है कि—
- कस्टम ड्यूटी में 9 प्रतिशत की नेट बढ़ोतरी के बावजूद
- सोना लगभग ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास
- और चांदी करीब ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई है
🌍 अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर
निलेश सारडा ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच कतर की मध्यस्थता में शांति समझौता लगभग तय माना जा रहा है। संभावना है कि शुक्रवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
इसके बाद यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य बिना शर्त और टोल मुक्त तरीके से खुलता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा, जिससे सोना-चांदी की कीमतों में बदलाव संभव है।
📉 ब्याज दरों का दबाव
हालांकि दूसरी ओर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने से कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है, जिससे बाजार में फिर से सुस्ती का माहौल देखा जा रहा है।
🔎 आगे की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय शांति समझौते, ऊर्जा बाजार की स्थिति और केंद्रीय बैंकों की नीतियां ही सोना-चांदी की दिशा तय करेंगी।





