नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के Gen Z (युवा पीढ़ी) को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि देश के युवाओं को किसी से भी देशभक्ति या ईमानदारी का प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। वहीं कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने भी आरएसएस और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कई सवाल उठाए।
प्रियंका गांधी ने साधा निशाना
प्रियंका गांधी ने कहा कि देश का युवा अपनी सोच, मेहनत और क्षमता के दम पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उन्हें किसी संगठन या व्यक्ति से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनके मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।
वेणुगोपाल ने सरकार और आरएसएस पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि यदि आरएसएस वास्तव में युवाओं की चिंता करता है तो उसे छात्रों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलनों के दौरान हुई घटनाओं पर सरकार को जवाब देना चाहिए और जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। उनका कहना था कि केवल बयान देने से युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
मोहन भागवत ने Gen Z पर जताया भरोसा
एक कार्यक्रम में युवाओं से संवाद के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें Gen Z पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले सभी तथ्यों की जानकारी होना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर ही राय बनानी चाहिए और बिना प्रमाण किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहिए।
युवाओं को बताया देश की ताकत
भागवत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी ईमानदार, ऊर्जावान और देश के भविष्य को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि संवाद की कमी कई बार असंतोष और आंदोलनों का कारण बन जाती है।
संवाद से निकल सकता है समाधान
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। उनका मानना है कि यदि सरकार और संबंधित पक्ष समय रहते संवाद स्थापित करें तो कई विवाद और आंदोलन टाले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलनों का उद्देश्य व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए, न कि टकराव पैदा करना।





