नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य और पेय पदार्थों की गुणवत्ता तथा लेबलिंग नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। फॉर्च्यून ब्रांड के सनफ्लावर ऑयल के नमूने में विटामिन-D की मात्रा निर्धारित मानक से कम पाए जाने के बाद संबंधित कंपनी पर जुर्माने की कार्रवाई की गई है। वहीं, पेप्सिको, रेड बुल और मॉन्स्टर जैसी कंपनियों को हाई-कैफीन पेय पदार्थों के लेबल से ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द हटाने के लिए दी गई 90 दिन की समयसीमा में राहत नहीं मिली है।

फॉर्च्यून सनफ्लावर ऑयल के नमूने में मिली कमी

रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा स्थित ताज फोर्ट अगुआडा रिजॉर्ट से फॉर्च्यून फ्रायोला रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल का नमूना लिया गया था। जांच के दौरान इसमें विटामिन-D की मात्रा निर्धारित सीमा से कम पाई गई।

इसके बाद कंपनी की ओर से दोबारा जांच की अपील की गई, लेकिन दूसरी जांच में भी विटामिन-D की कमी की पुष्टि हुई। इसके बाद संबंधित प्राधिकरण ने नियमानुसार जुर्माने की कार्रवाई को मंजूरी दी।

पेप्सिको और रेड बुल को समयसीमा में राहत नहीं

दूसरी ओर, FSSAI ने हाई-कैफीन पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों पर भी शिकंजा कस रखा है। जुलाई में पेप्सिको, रेड बुल, मॉन्स्टर बेवरेज समेत कई कंपनियों को अपने उत्पादों से ‘एनर्जी ड्रिंक’ या इससे मिलते-जुलते शब्द हटाने के निर्देश दिए गए थे।

कंपनियों को इसके लिए 90 दिन का समय दिया गया है। बताया जा रहा है कि कंपनियों ने मौजूदा स्टॉक और पैकेजिंग को देखते हुए करीब एक साल का समय मांगा था, लेकिन नियामक समयसीमा बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।

क्यों हटाना होगा ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द?

FSSAI का कहना है कि भारत में ‘एनर्जी ड्रिंक’ नाम से अलग आधिकारिक खाद्य मानक निर्धारित नहीं है। ऐसे में हाई-कैफीन पेय पदार्थों पर इस तरह की लेबलिंग नियमों के अनुरूप नहीं मानी जा रही है।

नियामक की सख्ती के बाद कंपनियों को अब तय अवधि के भीतर पैकेजिंग और लेबलिंग में बदलाव करना होगा। पेप्सिको ने अपने लोकप्रिय पेय Sting की पैकेजिंग से भी ‘Energy’ शब्द हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

राज्यों में भी कार्रवाई तेज

लेबलिंग नियमों को लेकर राज्यों में भी जांच अभियान चलाए जा रहे हैं। राजस्थान में Sting, Red Bull और अन्य संबंधित पेय पदार्थों के स्टॉक पर कार्रवाई की खबरें सामने आ चुकी हैं। लद्दाख में भी नियमों के उल्लंघन को लेकर जांच और जब्ती की कार्रवाई की जा रही है।

FSSAI की ताजा सख्ती से साफ है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता के साथ-साथ उनकी पैकेजिंग और उपभोक्ताओं के सामने किए जाने वाले दावों पर भी अब कड़ी निगरानी रखी जा रही है।