रायपुर। छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास यानी DMF फंड में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है। ईडी का आरोप है कि वह DMF फंड से जुड़े एक संगठित नेटवर्क में लायजनर और वित्तीय समन्वयक की अहम भूमिका निभा रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसे रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से ईडी को पांच दिन की रिमांड मिली।

जांच एजेंसी के मुताबिक, DMF ट्रस्टों की राशि का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और जनकल्याण के बजाय ऐसे सप्लाई आधारित कार्यों में किया गया, जहां सामान की कीमत बढ़ाकर दिखाने और कमीशन लेने की गुंजाइश अधिक थी। ईडी ने लोक सेवकों, लायजनरों और विभिन्न सप्लायरों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।


2019-20 से 2023-24 के बीच मिले 9,188 करोड़ रुपये

ईडी की जांच के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों को DMF ट्रस्टों के जरिए करीब 9,188.20 करोड़ रुपये मिले थे। आरोप है कि इस राशि के एक हिस्से को ऐसे कार्यों में लगाया गया, जहां सामान की कीमत बढ़ाकर दिखाने और कमीशन वसूलने की संभावना ज्यादा थी।

जांच में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से हुई खरीद और राशि के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं।


25 से 50 फीसदी तक कमीशन लेने का आरोप

ईडी का दावा है कि रेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम पाने वाली फर्मों और विक्रेताओं से भारी कमीशन वसूला जाता था। कुछ मामलों में खरीद आदेशों के आधार मूल्य पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने की बात जांच में सामने आई है।

एजेंसी का आरोप है कि इस रकम का हिस्सा संबंधित लोक सेवकों और प्रभावशाली लोगों तक भी पहुंचाया जाता था।


सतपाल छाबड़ा पर 31 करोड़ रुपये लेने का आरोप

ईडी के अनुसार, सतपाल सिंह छाबड़ा कथित तौर पर ऐसे सप्लाई कार्यों की पहचान करता था, जिनमें अधिक कमीशन मिलने की संभावना होती थी। इसके बाद इन कार्यों को अलग-अलग विक्रेताओं के बीच तय प्रतिशत के आधार पर बांटने, वर्क ऑर्डर जारी कराने और भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में उसकी भूमिका होने का आरोप है।

एजेंसी ने बैंक खातों के लेन-देन और PMLA के तहत दर्ज बयानों के आधार पर दावा किया है कि छाबड़ा को करीब 31 करोड़ रुपये का अवैध कमीशन मिला। ईडी ने इस रकम को अपराध से अर्जित आय बताया है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह पैसा छाबड़ा, उसके परिवार के सदस्यों और उससे जुड़ी संस्थाओं के खातों तक पहुंचा।


पहले भी कई ठिकानों पर हुई थी छापेमारी

DMF मामले में ईडी इससे पहले भी राज्य के कई स्थानों पर कार्रवाई कर चुकी है। सितंबर 2025 में रायपुर, दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर सहित कई जगह कारोबारियों, विक्रेताओं और ठेकेदारों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई थी।

जांच के दौरान कृषि सामग्री, बीज, कीटनाशक और उपकरणों की सप्लाई से जुड़े कार्यों में DMF राशि के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई थी।

यह जांच ACB/EOW और छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। अब सतपाल सिंह छाबड़ा की गिरफ्तारी के बाद ईडी कथित कमीशन नेटवर्क, बैंक लेन-देन और DMF राशि के इस्तेमाल में शामिल अन्य लोगों और संस्थाओं की भूमिका की भी जांच कर रही है।