दुर्ग, 30 जून 2026। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की आरक्षक (जीडी) भर्ती-2025 में फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। फर्जी जाति प्रमाणपत्र और निवास प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने वाले एक युवक को विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। मामले में सीआईएसएफ रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर (आरटीसी), भिलाई-उतई की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। चूंकि भर्ती प्रक्रिया भोपाल में पूरी हुई थी, इसलिए आगे की जांच के लिए मामला मध्यप्रदेश पुलिस को सौंपा गया है।


पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान मोहित (27 वर्ष) के रूप में हुई है। उसने कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) द्वारा आयोजित आरक्षक (जीडी) भर्ती-2025 के तहत आवेदन किया था। भर्ती के दौरान उसने जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर उसका चयन हो गया। चयनित होने के बाद उसे बुनियादी प्रशिक्षण के लिए सीआईएसएफ के रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर, भिलाई-उतई भेजा गया।


प्रशिक्षण के दौरान दस्तावेजों की जांच में हुआ खुलासा

सीआईएसएफ में प्रशिक्षण के दौरान सभी चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन किया जाता है। इसी प्रक्रिया के दौरान मोहित द्वारा प्रस्तुत जाति और निवास प्रमाणपत्रों पर अधिकारियों को संदेह हुआ। इसके बाद संबंधित राजस्व एवं प्रशासनिक विभागों से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया।

जांच में दोनों प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद सीआईएसएफ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी की नियुक्ति निरस्त कर उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया।


सरकारी नौकरी पाने के लिए रची साजिश

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने आरक्षण का लाभ लेने और सरकारी नौकरी हासिल करने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने भर्ती प्रक्रिया पूरी की और चयनित भी हो गया। हालांकि अंतिम दस्तावेज सत्यापन में उसकी पूरी साजिश उजागर हो गई।


सीआईएसएफ की शिकायत पर दर्ज हुआ अपराध

घटना को गंभीर मानते हुए सीआईएसएफ आरटीसी भिलाई-उतई के अधिकारियों ने संबंधित थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका उपयोग कर सरकारी नौकरी प्राप्त करने सहित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है।


भोपाल में होगी विस्तृत जांच

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज भोपाल स्थित भर्ती केंद्र में जमा किए गए थे। इसी वजह से मामले की विस्तृत विवेचना के लिए केस भोपाल भेजा गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाएंगी कि फर्जी जाति और निवास प्रमाणपत्र कहां से तैयार किए गए, उन्हें बनवाने में किन लोगों की भूमिका रही और क्या इस तरह के फर्जीवाड़े में कोई संगठित गिरोह सक्रिय है।


भर्ती प्रक्रिया में नहीं होगी किसी तरह की लापरवाही

सीआईएसएफ अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बलों की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और बहुस्तरीय जांच प्रणाली पर आधारित है। प्रत्येक अभ्यर्थी के दस्तावेजों का अलग-अलग स्तर पर सत्यापन किया जाता है। यदि कोई उम्मीदवार फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भर्ती पाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जाता है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस अब पूरे मामले की गहन जांच कर रही है, ताकि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले लोगों और संभावित गिरोह का भी पर्दाफाश किया जा सके।