रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विकसित भारत "वीबी-जी राम जी योजना" के तहत छत्तीसगढ़ में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार ने इस योजना के माध्यम से राज्य में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में छत्तीसगढ़ को 551 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है, जबकि योजना शुरू होने के बाद से अब तक राज्य को 1,593 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

ग्रामीण विकास और रोजगार का नया मॉडल

मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हुई वीबी-जी राम जी योजना के तहत सभी विकास कार्यों का चयन ग्राम सभा की मंजूरी से किया जाएगा। योजना में मजदूरी की दर बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत-2047' के संकल्प को गांव-गांव तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा और वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ को करीब 6,855 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे, जो ग्रामीण विकास और रोजगार के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। भारत सरकार से योजना की पहली किस्त के रूप में 1,538 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी है।

खेती और रोजगार दोनों का रखा गया संतुलन

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना तैयार करते समय किसानों और श्रमिकों दोनों के हितों को ध्यान में रखा गया है। कृषि कार्यों के दौरान मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में 60 दिनों तक योजना के कार्य स्थगित रखने का प्रावधान किया गया है, ताकि खेती और रोजगार दोनों प्रभावित न हों।

318 प्रकार के विकास कार्य होंगे शामिल

मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के तहत 318 प्रकार के विकास कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है।

  • 107 कार्य जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े होंगे।
  • 90 कार्य ग्रामीण अधोसंरचना विकास के होंगे।
  • 86 कार्य आजीविका संवर्धन से संबंधित होंगे।
  • 35 कार्य जलवायु परिवर्तन एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े होंगे।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के तहत तालाब, चेकडैम, रिचार्ज संरचनाएं, सिंचाई विस्तार, भू-जल संरक्षण, मृदा संरक्षण और वृक्षारोपण को प्राथमिकता दी जाएगी।

वहीं ग्रामीण अधोसंरचना के अंतर्गत सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, अतिरिक्त स्कूल कक्ष, ग्रामीण पुस्तकालय, प्रयोगशाला, किचन शेड, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, मुक्तिधाम और पशु चिकित्सालय जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजीविका संवर्धन के तहत ग्रामीण हाट-बाजार, कृषि उपज भंडारण केंद्र, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन से जुड़ी आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन के तहत बाढ़ एवं चक्रवात आश्रय, ड्रेनेज व्यवस्था, तटबंध निर्माण, जंगलों में आग रोकने के उपाय तथा प्राकृतिक आपदाओं के बाद पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में

मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियों में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

  • 98 प्रतिशत श्रमिकों की ई-केवाईसी पूरी कर राज्य देश में पहले स्थान पर है।
  • 99 प्रतिशत परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है।
  • युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से जीआईएस आधारित ग्राम पंचायत कार्ययोजना तैयार करने में भी राज्य अग्रणी रहा है।

'मोर गांव–मोर पानी' अभियान को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक विकासखंड में जल उपलब्धता के आधार पर जल संरक्षण कार्यों पर न्यूनतम निर्धारित व्यय सुनिश्चित किया जाएगा। इससे राज्य सरकार के 'मोर गांव–मोर पानी' अभियान को भी नई गति मिलेगी।

5,591 करोड़ रुपये का बजट, पहली तिमाही में 1,264 करोड़ खर्च

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 में वीबी-जी राम जी योजना के लिए 5,591.42 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। वहीं अप्रैल से जून 2026 की पहली तिमाही में ही 1,264 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आई है।

डिजिटल निगरानी से होगा पारदर्शी क्रियान्वयन

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, स्वच्छता, शिक्षा, सामाजिक अधोसंरचना और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाकर आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना है।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक कार्य को ग्राम सभा की स्वीकृति के बाद ही मंजूरी मिलेगी। साथ ही डिजिटल मॉनिटरिंग, समय पर मजदूरी भुगतान, गुणवत्ता नियंत्रण और सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से योजना के पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाएगा।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, योजना के आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।