बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली और फुटेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। गौरेला थाने की सितंबर 2024 की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार थानों में सीसीटीवी सिस्टम हर समय चालू रहना चाहिए। साथ ही रिकॉर्ड की गई फुटेज को निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि थानों में केवल सीसीटीवी कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं है। कैमरों की नियमित निगरानी के साथ पर्याप्त स्टोरेज क्षमता और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए पावर बैकअप की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। तकनीकी या प्रशासनिक लापरवाही के कारण महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट नहीं होने चाहिए।
एनडीपीएस मामले से जुड़ा है प्रकरण
मामला गौरेला थाने में दर्ज एनडीपीएस प्रकरण से संबंधित है। आरोपी बनवारी लाल गुप्ता समेत चार लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 13 से 15 सितंबर 2024 के बीच थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की पूरी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की थी।
आरोपियों का दावा था कि कथित घटना से एक दिन पहले उन्हें थाना परिसर में रखा गया था। उनका कहना था कि सीसीटीवी फुटेज सामने आने से उस समय उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इसके अलावा 14 सितंबर 2024 की मोबाइल सीडीआर और टावर लोकेशन उपलब्ध कराने की भी मांग की गई थी।
पुलिस ने कहा- स्वतः डिलीट हो गई फुटेज
ट्रायल कोर्ट में पुलिस की रिपोर्ट से सामने आया कि संबंधित अवधि की सीसीटीवी फुटेज अब सिस्टम में उपलब्ध नहीं है। पुलिस ने बताया कि निर्धारित 18 महीने की स्टोरेज अवधि पूरी होने के बाद फुटेज स्वतः डिलीट हो गई थी।
हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर माना कि याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई अवधि की फुटेज अब मौजूद नहीं है। ऐसे में उसे प्रस्तुत करने का निर्देश देना संभव नहीं है। इसी आधार पर आरोपियों की याचिका खारिज कर दी गई।
लापरवाही हुई तो तय हो जिम्मेदारी
याचिका खारिज करने के बावजूद हाईकोर्ट ने पुलिस थानों की सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता, नियमित निरीक्षण, पर्याप्त स्टोरेज और पावर बैकअप सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही के कारण कोई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट होता है तो इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
550 थानों के लिए 102.10 करोड़ की परियोजना पर विचार
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के 550 पुलिस थानों में सीसीटीवी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 102 करोड़ 10 लाख रुपये की परियोजना पर विचार किया गया है। जिला स्तरीय निगरानी समितियों को भी हर महीने सीसीटीवी सिस्टम की जांच करने और 18 महीने की फुटेज सुरक्षित रहने की पुष्टि करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने का उद्देश्य केवल निगरानी करना नहीं है। इससे पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने के साथ आपराधिक न्याय प्रक्रिया से जुड़े लोगों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
कोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का लगातार और प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।





