भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से बड़े पैमाने पर लौह स्क्रैप चोरी के बहुचर्चित मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगा। केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में राजपत्र में आदेश जारी होने के बाद केंद्रीय एजेंसी की जांच का रास्ता साफ हो गया है। अब तक इस मामले की जांच पुरानी भिलाई पुलिस कर रही थी।
26 मई की कार्रवाई से खुला था मामला
मामले की शुरुआत 26 मई को हुई थी। दुर्ग पुलिस ने पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र के अकलोरडीह-खदानपारा और हथखोज इलाके में स्थित ए.के. ट्रेडर्स से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की थी। पुलिस ने यहां से करीब 250 टन लौह स्क्रैप के साथ वाहन, जेसीबी, हाइड्रा और अन्य मशीनरी जब्त की थी। जब्त सामान और वाहनों की कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
जांच में आशंका सामने आई कि बीएसपी से स्क्रैप को दूसरी सामग्री की आड़ में बाहर निकालकर गोदाम तक पहुंचाया जाता था और इसके बाद इसे निजी औद्योगिक इकाइयों में खपाया जाता था। अब सीबीआई इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों की पड़ताल करेगी।
अब तक 21 गिरफ्तारियां
पुलिस की जांच में बीएसपी के अधिकारी-कर्मचारी, कारोबारी, ट्रांसपोर्टर और निजी कंपनियों से जुड़े लोगों सहित कुल 21 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। इनमें ट्रांसपोर्टर संजय सिंह, अभय सिंह, कारोबारी हिमांशु खंडेलवाल और बीएसपी के जीएम हिमांशु भूषण मलिक समेत कई नाम शामिल हैं। 18 सितंबर को रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड के एमडी विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह को भी गिरफ्तार किया गया था।
मामले में बीएसपी प्रबंधन ने जीएम हिमांशु भूषण मलिक, धनंजय वर्मा और मनोज कुमार देवांगन को निलंबित भी किया था।
विधायक रिकेश सेन लगातार कर रहे थे CBI जांच की मांग
वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन इस मामले की सीबीआई जांच की मांग लगातार उठाते रहे थे। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी। अब राजपत्र में आदेश जारी होने के बाद सीबीआई मामले की जांच संभालेगी।
सीबीआई की जांच में स्क्रैप को संयंत्र से बाहर निकालने की प्रक्रिया, परिवहन, भंडारण, निजी इकाइयों तक पहुंचाने और पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका की नए सिरे से पड़ताल होने की संभावना है।





