रायपुर। झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में विशेष NIA अदालत द्वारा 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है।


अरुण साव बोले- साक्ष्यों के आधार पर आया फैसला

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया में बड़ी संख्या में साक्ष्य और गवाहों के बयान अदालत के सामने रखे गए। उनके मुताबिक NIA की चार्जशीट, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई है।

साव ने कांग्रेस की ओर से झीरम मामले को लेकर उठाए गए सवालों पर कहा कि यदि किसी के पास अतिरिक्त साक्ष्य हैं तो उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर न्यायिक प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक सवाल उठाने का आरोप भी लगाया।


विजय शर्मा ने कहा- अनावश्यक राजनीति से बचना चाहिए

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झीरम घाटी मामले की NIA जांच के आधार पर लंबे समय तक अदालत में सुनवाई चली और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद फैसला सामने आया है।

उन्होंने कांग्रेस पर इस मामले को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उनके पास मामले से जुड़े कोई साक्ष्य थे या अब भी हैं, तो उन्हें अदालत के सामने रखा जा सकता है।


10 दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा

जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 5 सितंबर 2026 को झीरम घाटी हमले के मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। 16 सितंबर को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। यह मामला करीब 13 वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया में रहा।


25 मई 2013 को हुआ था हमला

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार सहित कई कांग्रेस नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों की मौत हुई थी। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या को लेकर अंतर मिलता है।


फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज

अदालत के फैसले के बाद भाजपा नेताओं ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का नतीजा बताते हुए कांग्रेस से उपलब्ध साक्ष्य अदालत में रखने की बात कही है। दूसरी ओर, कांग्रेस पहले भी झीरम हमले के पीछे की व्यापक साजिश और अन्य पहलुओं की जांच को लेकर सवाल उठाती रही है।