दीपावली के बीच किसानों की आर्थिक परेशानियों और महंगाई का मुद्दा उठाया, पटवारी हड़ताल से फसल सत्यापन पर असर की आशंका, ग्रामीण कारोबार और मजदूरों की आजीविका पर भी चिंता

रायपुर, 22 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में दीपावली के त्योहारी माहौल के बीच धान खरीदी की तैयारियों को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी की व्यवस्था को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग करते हुए सरकार से पूछा कि आखिर निर्धारित समय पर खरीदी क्यों नहीं की जा रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार धान खरीदी की समुचित व्यवस्था नहीं कर पा रही है।


एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा के दौरान धान खरीदी की तैयारियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को एक नवंबर से किसानों का धान खरीदना चाहिए।

बघेल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि धान खरीदी समय पर शुरू नहीं होने के संबंध में सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने किसानों से जुड़ी इस महत्वपूर्ण व्यवस्था को समय पर संचालित करने की आवश्यकता बताई।


पटवारी हड़ताल से किसानों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

इधर, प्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने धान खरीदी से पहले राजस्व विभाग की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। पीवी ऐप में तकनीकी समस्याओं, निलंबन की कार्रवाई और लंबित मांगों को लेकर पटवारी आंदोलन कर रहे हैं।

हड़ताल के कारण गिरदावरी, फसल सत्यापन और अन्य राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने की आशंका है। इन प्रक्रियाओं में देरी होने पर किसानों को धान बेचने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।


दीपावली पर महंगाई को लेकर भी सरकार को घेरा

भूपेश बघेल ने त्योहार के दौरान बढ़ती महंगाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई के कारण आम जनता आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही है।

त्योहारी सीजन में किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए कृषि कार्यों का खर्च, घरेलू जरूरतें और मजदूरी का भुगतान महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में धान खरीदी की समय-सीमा और भुगतान की व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम मानी जा रही है।


किसानों की आमदनी से जुड़ा मजदूरों और व्यापारियों का कारोबार

छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। किसानों को फसल का भुगतान मिलने से स्थानीय बाजारों में खरीदारी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।

धान खरीदी या भुगतान में देरी होने पर किसानों की क्रयशक्ति प्रभावित हो सकती है। इसका अप्रत्यक्ष असर कृषि मजदूरों, छोटे दुकानदारों, परिवहन व्यवसायियों और अन्य स्थानीय कारोबारियों पर भी पड़ने की आशंका रहती है।

हालांकि, इस संबंध में प्रदेशव्यापी आर्थिक नुकसान का कोई आधिकारिक आकलन सामने नहीं आया है।


धान खरीदी की तैयारियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज

धान खरीदी की समय-सीमा को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार से सवाल कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग उठाई है। उन्होंने पटवारी हड़ताल के कारण किसान पंजीयन और फसल सत्यापन प्रभावित होने का मुद्दा सामने रखा है।

वहीं, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने धान खरीदी से पहले गिरदावरी का कार्य समय पर पूरा करने को आवश्यक बताया है।

फिलहाल धान खरीदी की तैयारियों, पटवारियों की हड़ताल और किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में खरीदी प्रक्रिया का समय पर संचालन और राजस्व संबंधी कार्यों का निराकरण किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।