बालोद। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बालोद दौरे के दौरान परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 की परीक्षा में सही और गलत उत्तरों पर समान अंक दिए गए, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
2025 का पेपर छात्रों के सामने रखने की मांग
भूपेश बघेल ने कहा कि वर्ष 2025 का प्रश्नपत्र छात्रों के सामने सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि अभ्यर्थी स्वयं यह देख सकें कि परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे गए और मूल्यांकन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर हजारों युवाओं के भविष्य पर पड़ता है।
2024 की परीक्षा पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2024 की परीक्षा में कुछ ऐसे मामले सामने आए, जहां सही और गलत उत्तरों के लिए समान अंक दिए गए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
यह दावा भूपेश बघेल की ओर से किया गया है और परीक्षा से जुड़ी अंतिम स्थिति संबंधित जांच तथा आधिकारिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।
इंटरव्यू रोके जाने का भी किया जिक्र
बघेल ने भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू रोके जाने का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इससे अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हुई है और पूरी चयन प्रक्रिया को लेकर संदेह बढ़ा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि परीक्षा और इंटरव्यू से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि अभ्यर्थियों को स्पष्ट जानकारी मिल सके।
पूरे मामले की CBI जांच की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग की। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया, मूल्यांकन और इंटरव्यू से जुड़े सवालों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी तरह की अस्पष्टता नहीं रहनी चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से सामने आनी चाहिए।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
भूपेश बघेल के आरोपों और CBI जांच की मांग पर सरकार या संबंधित परीक्षा एजेंसी की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस जारी है।





