भोपाल। लोक निर्माण विभाग (PWD) में वरिष्ठता को दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारियों को उच्च पदों पर पदस्थ किए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। यह कोई नया विवाद नहीं है, लेकिन इस बार हाईकोर्ट की सख्ती के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

🏛️ क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, विभाग में कुछ मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की उपेक्षा कर कनिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी। इस मामले में प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह से जवाब मांगा गया था, लेकिन उन्होंने समय पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया।

⚖️ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने प्रमुख सचिव के जवाब न देने को गंभीर माना और भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराने की सख्त चेतावनी दी।

हाईकोर्ट की सख्ती का असर यह हुआ कि जिन अधिकारियों की पदस्थापना पर सवाल उठे थे, उनके तबादले के आदेश संशोधित कर दिए गए।

😡 कर्मचारी संगठनों का आरोप

कर्मचारी संगठनों ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि—

  • जब बड़े अधिकारियों से जुड़ा मामला होता है, तो आदेश तुरंत संशोधित कर दिए जाते हैं
  • लेकिन लाखों कर्मचारियों से जुड़े मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है
  • इससे प्रशासन में असमानता और भेदभाव की स्थिति बनती है

📌 संगठनों की मांग

कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि—

  • सभी कर्मचारियों के लिए एक समान नीति लागू की जाए
  • तबादला और पदस्थापना में पारदर्शिता लाई जाए
  • वरिष्ठता और नियमों का सख्ती से पालन किया जाए

🏛️ आगे की स्थिति

मामला अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट की सख्ती के बाद विभाग भविष्य में पदस्थापन और तबादला नीति को लेकर अधिक सतर्क हो सकता है।

👉 यह मामला एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, समानता और नियमों के पालन को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।