बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव के प्रसिद्ध मगरमच्छ 'गंगाराम' की अनोखी कहानी अब देशभर के स्कूली बच्चों तक पहुंचेगी। एनसीईआरटी (NCERT) ने इंसान और वन्यजीव के बीच सह-अस्तित्व की मिसाल बने गंगाराम की कहानी को अपने नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इसका उद्देश्य बच्चों में प्रकृति, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है।


तीन दशक तक ग्रामीणों के साथ रहा गंगाराम

बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव के तालाब में रहने वाला गंगाराम करीब 30 वर्षों तक ग्रामीणों और मवेशियों के बीच बिना किसी हमले के शांतिपूर्वक रहा। गांव के लोग उसी तालाब में नहाते, पानी भरते, कपड़े धोते और अपने पशुओं को पानी पिलाते थे। बच्चे भी तालाब के आसपास खेलते थे, लेकिन गंगाराम ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। इसी वजह से ग्रामीण उसे अपने परिवार का सदस्य मानते थे।


2019 में हुई थी प्राकृतिक मौत

वर्ष 2019 में गंगाराम की प्राकृतिक मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल था। ग्रामीणों ने पूरे धार्मिक रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार किया और बाद में उसकी स्मृति में तालाब किनारे एक स्मारक/मंदिर भी बनवाया। बच्चों को मिलेगा सह-अस्तित्व का संदेश

एनसीईआरटी ने गंगाराम की कहानी को पाठ्यक्रम में इसलिए शामिल किया है ताकि नई पीढ़ी को यह संदेश दिया जा सके कि प्रकृति और वन्यजीवों के साथ संतुलित और संवेदनशील व्यवहार करते हुए इंसान और जीव-जंतु एक साथ शांतिपूर्वक रह सकते हैं। यह कहानी पर्यावरण संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व का प्रेरक उदाहरण मानी जा रही है।