बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पेयजल की समस्या को लेकर तीन दिनों से आंदोलन कर रहे ग्रामीणों के खिलाफ शनिवार सुबह पुलिस ने कार्रवाई की। दल्लीराजहरा-महामाया मार्ग पर चक्काजाम और आमरण अनशन कर रहे आड़ेझर गांव के ग्रामीणों को पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से हटा दिया। जानकारी के मुताबिक, 102 पुरुषों को दल्लीराजहरा के ओपन थिएटर और करीब 30 से 40 महिलाओं को आईटीआई परिसर में रखा गया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है।
बोइरडीही जलाशय से पेयजल आपूर्ति की मांग पर अड़े ग्रामीण
जानकारी के अनुसार, आड़ेझर गांव के हजारों ग्रामीण बोइरडीही जलाशय से गांव में पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर ग्रामीण गुरुवार से दल्लीराजहरा-महामाया मुख्य मार्ग पर धरने पर बैठे थे।
प्रदर्शन के दौरान नौ ग्रामीण आमरण अनशन पर भी बैठे थे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पेयजल संबंधी समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर उन्होंने आंदोलन शुरू किया था।
तीन दिनों तक समझाइश के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
बताया जा रहा है कि आंदोलन समाप्त कराने के लिए प्रशासन ने लगातार तीन दिनों तक ग्रामीणों से बातचीत और समझाइश का प्रयास किया। हालांकि, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और प्रदर्शन समाप्त करने को तैयार नहीं हुए।
इसके बाद शनिवार सुबह पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाया। कार्रवाई के दौरान पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया।
चक्काजाम से लौह अयस्क परिवहन हुआ प्रभावित
ग्रामीणों के आंदोलन का असर क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ा। दल्लीराजहरा-महामाया मार्ग पर चक्काजाम के कारण महामाया, दुलकी और कलवर माइंस से लौह अयस्क का परिवहन करने वाले हजारों वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
लगातार तीन दिनों तक सड़क पर प्रदर्शन होने से औद्योगिक परिवहन व्यवस्था में बाधा उत्पन्न हो रही थी।
पुलिस कार्रवाई से ग्रामीणों में आक्रोश, सामूहिक गिरफ्तारी की आशंका
पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने के बाद आड़ेझर गांव में नाराजगी का माहौल है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस कार्रवाई के विरोध में गांव के अन्य लोग भी एकजुट होकर सामूहिक गिरफ्तारी दे सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल ग्रामीणों की पेयजल आपूर्ति की मांग का समाधान होना बाकी है। ऐसे में प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ ग्रामीणों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की चुनौती बनी हुई है।





