रायपुर। प्रसिद्ध कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने रविवार को रायपुर में सनातन संस्कृति, शिक्षा, धर्मांतरण और सामाजिक मूल्यों से जुड़े कई मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को केवल धन कमाने की शिक्षा दी जा रही है, जबकि गीता और भारतीय संस्कृति के संस्कारों से दूर किया जा रहा है।
रायपुर के बुढ़ापारा इंडोर स्टेडियम में 8 से 14 जुलाई तक आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा से पहले प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मुस्लिम और ईसाई परिवार अपने धार्मिक ग्रंथों से बच्चों को जोड़ते हैं, जबकि हिंदू समाज अपने बच्चों को गीता और महाभारत का ज्ञान देने में पीछे रह गया है। उनके अनुसार, बच्चों के चरित्र निर्माण के लिए धार्मिक और नैतिक शिक्षा आवश्यक है।
लिव-इन रिलेशनशिप पर जताई चिंता
देवकी नंदन ठाकुर ने हाल के दिनों में सामने आए हत्या के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी गलत दिशा में जा रही है। उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है और इससे सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सनातन बोर्ड के गठन की मांग
उन्होंने देश में सनातन बोर्ड के गठन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि सरकार मदरसों को सहायता देती है, लेकिन गुरुकुलों और मंदिरों के लिए भी समान रूप से योजनाएं बनाई जानी चाहिए। उनका कहना था कि सनातन परंपरा और संस्कृति को सशक्त बनाने के लिए संस्थागत व्यवस्था जरूरी है।
धर्मांतरण पर भी रखी राय
धर्मांतरण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा किसी का धर्म परिवर्तन कराने का समर्थन नहीं करती। उनका कहना था कि युवाओं को यदि गीता और भारतीय संस्कृति का सही ज्ञान मिले, तो वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे।
स्कूलों में नैतिक शिक्षा पर दिया जोर
उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चों के चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, बच्चों को भारतीय इतिहास, संस्कृति और आदर्श व्यक्तित्वों से परिचित कराया जाना चाहिए, ताकि उनमें अच्छे संस्कार विकसित हो सकें।
संसद में धर्माचार्य प्रतिनिधित्व की वकालत
देवकी नंदन ठाकुर ने संसद में धर्माचार्य और नैतिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज और देश के हित में नीति निर्माण के दौरान सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को भी महत्व मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी के मौन पर भी की टिप्पणी
राम मंदिर में चोरी की घटना से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विषय पर मौन हैं, तो संभव है कि भविष्य में कोई बड़ा निर्णय लिया जाए। हालांकि यह उनका व्यक्तिगत आकलन है।





