बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सामने आए सर्पदंश मुआवजा घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय और तहसील कार्यालय के तीन बाबुओं को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन कर्मचारियों ने फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दस्तावेज तैयार कर सर्पदंश से मौत के झूठे प्रकरण बनाकर सरकारी सहायता राशि का गबन किया।


पुलिस के अनुसार, सरकंडा थाना क्षेत्र में पहले एक व्यक्ति की फांसी लगाकर आत्महत्या का मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया था। जांच में सामने आया कि इसी मर्ग नंबर का दुरुपयोग करते हुए आरोपियों ने फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज तैयार किए।

जांच के दौरान पता चला कि तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर, एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक और गरीब बिंझवार ने मिलकर फर्जी सर्पदंश मृत्यु के मामले तैयार किए और उन्हें कलेक्टोरेट में सरकारी सहायता राशि स्वीकृत कराने के लिए प्रस्तुत किया। पुलिस के मुताबिक, इस तरीके से 15 फर्जी मामलों में मुआवजा राशि निकाली गई।


तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

इस घोटाले में इससे पहले एक महिला डॉक्टर की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि फर्जी सर्पदंश मामलों के जरिए सरकारी धन के गबन की जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


पुलिस के अनुसार, अब तक इस पूरे मामले में 17 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेजों और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।