रायपुर। छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है। पार्टी का आरोप है कि सरकार की ओर से विश्व आदिवासी दिवस पर अपेक्षित आयोजन नहीं किए जाने से आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। अब कांग्रेस इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर उठाते हुए आज 15 जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रही है।

कांग्रेस की ओर से अलग-अलग जिलों में वरिष्ठ नेता और जिला प्रभारी मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखेंगे। इस दौरान विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन को लेकर सरकार से सवाल पूछने के साथ ही आदिवासी समाज के सम्मान, अधिकार और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

सरगुजा से बस्तर तक सरकार को घेरने की रणनीति

कांग्रेस ने विश्व आदिवासी दिवस के मुद्दे को केवल राजधानी तक सीमित न रखते हुए सरगुजा से बस्तर तक उठाने की योजना बनाई है। इसके तहत प्रदेश के 15 जिलों में जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी।

इन प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिम्मेदारी संबंधित जिलों के प्रभारियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है। कांग्रेस का कहना है कि आदिवासी समाज के सम्मान और अधिकार से जुड़े विषयों पर पार्टी सरकार से जवाब मांगेगी।

प्रदेश कांग्रेस ने जारी किए निर्देश

इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैंदू की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। संबंधित जिला प्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पार्टी का पक्ष सामने रखें।

पार्टी नेताओं का कहना है कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज की पहचान, परंपरा, संस्कृति और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। कांग्रेस इसी आधार पर सरकार के रुख को लेकर सवाल उठा रही है।

आदिवासी मुद्दे पर बढ़ सकती है सियासी खींचतान

छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी मतदाताओं की अहम भूमिका रही है। बस्तर और सरगुजा समेत प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में आदिवासी मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में विश्व आदिवासी दिवस को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।

कांग्रेस जहां इस मुद्दे को आदिवासी सम्मान से जोड़कर भाजपा सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं अब इस अभियान पर सत्तारूढ़ भाजपा की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।