बिलासपुर। 3 करोड़ 80 लाख रुपये के नकली नोटों की बरामदगी से जुड़े बहुचर्चित मामले में विशेष एनआईए कोर्ट ने आरोपी डोमेन्द्र महिपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश करने में विफल रहा, इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया गया।
विशेष एनआईए न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपी के खिलाफ न तो कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध कराया गया और न ही कोई मजबूत परिस्थितिजन्य प्रमाण या कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) पेश किया गया, जिससे उसके अपराध में शामिल होने की पुष्टि हो सके।
पिकअप वाहन से बरामद हुए थे 3.80 करोड़ के नकली नोट
यह मामला महासमुंद जिले के सरायपाली थाना क्षेत्र का है। 31 जनवरी 2024 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सारंगढ़ की ओर से आ रही एक पिकअप में नकली नोटों की खेप लाई जा रही है।
सूचना पर पुलिस ने अग्रसेन चौक, सरायपाली में नाकेबंदी कर वाहन को रोका। चालक अरुण सिदार की निशानदेही पर पिकअप में साड़ियों के नीचे छिपाकर रखी गई चार प्लास्टिक बोरियों से 500 रुपये के नकली नोटों की 3.80 करोड़ रुपये की खेप बरामद की गई थी।
अदालत ने दिया संदेह का लाभ
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपी डोमेन्द्र महिपाल के खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिससे उसकी भूमिका संदेह से परे साबित हो सके। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
हालांकि, इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों और नकली नोटों के नेटवर्क की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।




