महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अंधविश्वास और सामाजिक प्रताड़ना का एक गंभीर मामला सामने आया है। बागबाहरा क्षेत्र की एक महिला को कथित तौर पर 'टोनही' (डायन) बताकर न केवल बदनाम किया गया, बल्कि उसका और उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार भी कर दिया गया। लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने पर पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने 23 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


टोनही बताकर किया गया सामाजिक बहिष्कार

पीड़िता का आरोप है कि मोहल्ले के कुछ लोगों ने उसे टोनही बताकर पूरे इलाके में बदनाम किया। इसके बाद लोगों को उसके परिवार से दूरी बनाने के लिए उकसाया गया। यहां तक कि आसपास के दुकानदारों से भी परिवार को सामान नहीं देने की बात कही गई। इस वजह से परिवार को सामाजिक, मानसिक और आर्थिक रूप से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।


पुलिस से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

महिला ने सबसे पहले स्थानीय पुलिस से शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन जब लंबे समय तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया तो उसने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत में परिवाद दायर किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया।


कोर्ट के आदेश पर 23 लोगों के खिलाफ एफआईआर

अदालत के निर्देश के बाद पुलिस ने 23 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों पर छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई है। पुलिस अब सभी आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।


अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कानून

छत्तीसगढ़ में किसी व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं, को टोनही या डायन बताकर प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में राज्य में विशेष कानून लागू है, जिसका उद्देश्य अंधविश्वास के नाम पर होने वाली हिंसा, सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न पर रोक लगाना है।


जांच जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं यह मामला एक बार फिर समाज में अंधविश्वास के दुष्परिणाम और जागरूकता की आवश्यकता को उजागर करता है।