जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में करीब 13 साल बाद न्यायिक प्रक्रिया निर्णायक दौर में पहुंच गई है। जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में अंतिम बहस शुरू हो चुकी है। सोमवार को अभियोजन पक्ष ने दिनभर अपनी दलीलें रखीं। न्यायालयीन समय समाप्त होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और अब बचाव पक्ष को अंतिम तर्क रखने का अवसर मिलेगा। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
इधर, मामले की सुनवाई को लेकर प्रदेश में सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस झीरम मामले को लेकर राजनीति कर रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि कांग्रेस को न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है तो उसके नेता खुद जज बनकर राजीव भवन से ही फैसला सुना दें।
NIA की विशेष अदालत में अंतिम दलीलों का दौर
जगदलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में सोमवार से अंतिम बहस शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष मामले से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपने तर्क प्रस्तुत किए। पूरे दिन अभियोजन की दलीलें चलीं, लेकिन समय समाप्त होने के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। अब बचाव पक्ष अपनी अंतिम दलीलें अदालत के सामने रखेगा।
मामले में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। गवाहों की गवाही, परीक्षण-प्रतिपरीक्षण और दस्तावेजी साक्ष्यों से जुड़ी लंबी प्रक्रिया के बाद मामला अंतिम बहस तक पहुंचा है। अंतिम तर्क पूरे होने के बाद अदालत फैसला सुरक्षित रख सकती है अथवा निर्णय सुनाने के लिए अगली तारीख निर्धारित कर सकती है।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। मृतकों में महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल और उदय मुदलियार जैसे प्रमुख नेता शामिल थे, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनका निधन हो गया था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
करीब 13 वर्षों से इस मामले में जांच और अदालती प्रक्रिया चल रही है। अब अंतिम बहस शुरू होने के साथ पीड़ित परिवारों और प्रदेश की निगाहें अदालत की आगामी कार्रवाई पर टिक गई हैं।
कांग्रेस के बयानों पर अजय चंद्राकर का पलटवार
झीरम मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं के बयानों पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को मामले की सच्चाई सामने आने से ज्यादा इसमें राजनीति करने में दिलचस्पी है।
चंद्राकर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता यदि पहले से ही निष्कर्ष पर पहुंच चुके हैं तो वे स्वयं जज बन जाएं और राजीव भवन से फैसला सुना दें। उन्होंने कहा कि मामला अदालत में है और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही इसका निर्णय होना चाहिए।
अंतिम दलीलों के बाद अदालत के अगले कदम पर नजर
झीरम घाटी कांड छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में शामिल है। लंबे समय से पीड़ित परिवार और राजनीतिक दल इस मामले में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत क्या रुख अपनाती है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।
अदालत बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख सकती है या निर्णय सुनाने के लिए अलग तारीख तय कर सकती है। ऐसे में करीब 13 साल पुराने झीरम मामले में आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।





