बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में महिलाओं से जुड़े 47 मामलों की सुनवाई हुई। घरेलू हिंसा, भरण-पोषण, दूसरी शादी, संपत्ति विवाद, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और पुलिस जांच में लापरवाही जैसे मामलों पर सुनवाई करते हुए आयोग ने कई अहम निर्देश जारी किए। सबसे गंभीर मामला एक ऐसी महिला का सामने आया, जिसे उसकी बेटियों ने पिता की साजिश का शिकार बताया।

बेटियों का आरोप- भरण-पोषण से बचने मां को भेजा जेल

जनसुनवाई में दो बेटियों ने आयोग के समक्ष आरोप लगाया कि उनके पिता ने पत्नी और बेटियों को भरण-पोषण देने से बचने के लिए उनकी मां को झूठे एनडीपीएस एक्ट के मामले में फंसा दिया। बेटियों ने बताया कि उनके पिता वर्ष 2006 से मेडिकल व्यवसाय से जुड़े हैं और वर्ष 2013 से सरकंडा के अशोकनगर स्थित मेडिकल स्टोर का संचालन कर रहे थे। बाद में उन्होंने मेडिकल स्टोर भांजे के नाम बेचने का दावा किया, लेकिन आज भी उसी दुकान में कार्यरत हैं।

बेटियों का आरोप है कि पिता ने पहले मां को झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी थी और बाद में घर की छत पर नशीली दवाएं रखवाकर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज करा दिया। उनकी मां पिछले करीब छह महीने से जेल में बंद हैं।

महिला आयोग ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने एफआईआर और जब्ती से जुड़े दस्तावेज आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए। दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद आयोग ने पाया कि जब्त दवाइयों के बैच नंबर के आधार पर यह जांच ही नहीं की गई कि दवाएं किस डीलर से खरीदी गई थीं और उनकी सप्लाई चेन क्या थी।

आयोग ने सरकंडा पुलिस को निर्देश दिए कि जब्त दवाइयों की दोबारा वैज्ञानिक और दस्तावेजी जांच कराई जाए तथा यह भी पता लगाया जाए कि उनका मेडिकल स्टोर से कोई संबंध है या नहीं। साथ ही आवेदिका और उसके परिजनों से विस्तृत पूछताछ कर वास्तविक तथ्यों का पता लगाने के निर्देश दिए गए, ताकि यदि महिला निर्दोष है तो उसे न्याय मिल सके।

भरण-पोषण और दूसरी शादी के मामले में भी दी कानूनी सलाह

महिला आयोग ने पीड़ित बेटियों को परिवार न्यायालय में लंबित भरण-पोषण प्रकरण दोबारा शुरू कराने, बकाया राशि की वसूली और नियमित भरण-पोषण प्राप्त करने के लिए आवेदन करने की सलाह दी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी की गई है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई कराई जा सकती है।

शिक्षकों के विवाद सहित कई मामलों का हुआ निपटारा

जनसुनवाई में दो शिक्षकों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में दोनों पक्षों को भविष्य में अनावश्यक शिकायतें नहीं करने की समझाइश देकर मामला समाप्त कराया गया। वहीं कई प्रकरण पति-पत्नी के बीच समझौता, तलाक या आपसी सहमति बनने के बाद निस्तारित कर दिए गए।

सामाजिक समझौते वाले मामले में दिए विशेष निर्देश

एक अन्य मामले में सामाजिक समझौते के तहत महिला को एक लाख रुपये दिए जाने की जानकारी आयोग को दी गई। आयोग ने सखी केंद्र के काउंसलर की मौजूदगी में महिला को उसका सामान दिलाने तथा पूरी प्रक्रिया की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश दिए।