रायपुर। राजधानी स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (आंबेडकर अस्पताल) के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल शल्य चिकित्सा कर गरियाबंद जिले के एक युवक की जान बचा ली। युवक की पीठ में धंसा तीर पेट के अंदरूनी अंगों तक पहुंच गया था, जिससे उसकी हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी। समय रहते की गई इमरजेंसी सर्जरी के बाद उसकी जान बचाई जा सकी। फिलहाल मरीज आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर भर्ती है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार जारी है।
जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह ने बताया कि गरियाबंद निवासी युवक की पीठ में लगा तीर पेट के भीतर काफी गहराई तक पहुंच गया था। इससे आंतरिक अंगों को गंभीर क्षति पहुंची और पेट में छेद (परफोरेशन) होने के साथ तेज आंतरिक रक्तस्राव शुरू हो गया था। संक्रमण का खतरा भी लगातार बढ़ रहा था। चिकित्सकों के अनुसार, यदि कुछ और देर हो जाती तो मरीज की जान बचाना मुश्किल हो सकता था।
मरीज की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल आपातकालीन ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों की टीम ने 2 जुलाई को कई घंटे तक चली जटिल सर्जरी के दौरान सावधानीपूर्वक तीर को बाहर निकाला और क्षतिग्रस्त अंगों का उपचार किया।
आईसीयू में विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार जारी
सफल ऑपरेशन के बाद मरीज को तत्काल गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया। फिलहाल उसे वेंटिलेटर और हेमोडायनामिक सपोर्ट पर रखा गया है। डॉक्टरों की टीम 24 घंटे उसके ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन सैचुरेशन सहित सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों की लगातार निगरानी कर रही है। संक्रमण की आशंका को देखते हुए उसे एंटीबायोटिक थेरेपी भी दी जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि अगले कुछ दिन मरीज की रिकवरी के लिहाज से बेहद अहम होंगे।
ट्रॉमा मरीजों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहती है विशेषज्ञ टीम
आंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि अस्पताल में गंभीर ट्रॉमा और आपातकालीन मामलों के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम तथा अत्याधुनिक सुविधाएं चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल का प्रयास है कि प्रदेश के हर मरीज को समय पर गुणवत्तापूर्ण और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।





