बिलासपुर। सर्पदंश से मौत की फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर सरकारी मुआवजा दिलाने के कथित रैकेट में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिम्स की पूर्व चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने दो मामलों में सर्पदंश से मौत की झूठी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की थी। मामला तोरवा थाना क्षेत्र का है।
दो मामलों की जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा
पुलिस के अनुसार, तहसील कार्यालय के नायब नाजिर की शिकायत पर महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामलों की जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान पता चला कि दोनों शवों का पोस्टमार्टम तत्कालीन सिम्स चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी ने किया था। आरोप है कि उन्होंने सर्पदंश से मौत की फर्जी रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर मुआवजा लेने की प्रक्रिया पूरी की गई। कार्रवाई के बाद पुलिस ने फरार चल रहीं डॉ. प्रियंका को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
तीन आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल
इस मामले में पुलिस पहले ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इनमें मृतक निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी और अधिवक्ता रंजीत कुमार चतुर्वेदी शामिल हैं। वहीं, इस पूरे गिरोह का मुख्य आरोपी बताए जा रहे अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार अभी फरार हैं। पुलिस के मुताबिक, वह लंबे समय से गंभीर बीमारी का इलाज करा रहा है।
पांच अन्य डॉक्टर भी जांच के दायरे में
पुलिस का कहना है कि जिले में सर्पदंश से मौत के कुल 15 संदिग्ध मामलों की जांच चल रही है। इन मामलों में चार से पांच अन्य चिकित्सकों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों की गहन पड़ताल कर रही है।
डॉ. प्रियंका पर एक और मामला दर्ज
डॉ. प्रियंका सोनी के खिलाफ सिविल लाइन थाना क्षेत्र में भी एक अलग मामला दर्ज है। आरोप है कि उन्होंने तालापारा निवासी पवन यादव की मौत को सर्पदंश से हुई बताकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की थी, जबकि जांच में मौत का कारण हार्ट अटैक पाया गया। इस मामले में मृतक की पत्नी और एक अन्य आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अब सिविल लाइन पुलिस डॉ. प्रियंका को प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी।
2025 में सामने आया था पहला मामला
बिलासपुर जिले में फर्जी सर्पदंश रिपोर्ट का पहला मामला वर्ष 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र से सामने आया था। उस समय जहर सेवन से हुई एक मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगा था। उस मामले में भी डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक अधिवक्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
15 मामलों की जांच जारी
पुलिस के अनुसार, जिले में सर्पदंश से मौत दर्शाकर सरकारी मुआवजा हासिल करने के 15 मामलों की जांच जारी है। सभी प्रकरणों की समीक्षा की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




