नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन रविवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आम लोगों की आवाजाही सामान्य रखने और मेट्रो सहित आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के निर्देश दिए। वहीं, हिरासत में लिए गए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत तीन नेताओं को रिहा कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रविवार को विशेष सुनवाई हुई।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित क्षेत्रों से बाहर शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
मेट्रो स्टेशन बंद करने पर केंद्र सरकार से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के मामले में केंद्र सरकार तथा संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
अदालत ने पूर्व आदेशों के पालन को लेकर जवाब मांगा है। साथ ही अधिकारियों से पूछा गया है कि आदेशों की अवहेलना के आरोप में उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
संबंधित अधिकारियों को मंगलवार तक प्रारंभिक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
अभिजीत दीपके समेत तीन नेताओं को मिली रिहाई
दिल्ली पुलिस की एहतियाती कार्रवाई के तहत हिरासत में लिए गए CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास को रविवार को रिहा कर दिया गया।
तीनों नेताओं को दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था। पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई थी।
अदालत ने तीनों को एक वर्ष तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
हालांकि, इस शर्त का अर्थ यह नहीं है कि वे अगले एक वर्ष तक किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग नहीं ले सकेंगे।
प्रदर्शन के दौरान 20 से अधिक FIR दर्ज
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के आरोप में 20 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की हैं।
पुलिस के अनुसार, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने जैसी घटनाओं को लेकर मामले दर्ज किए गए हैं।
वहीं, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का मुद्दा उठाया है।
245 ट्रेनें रद्द होने के बाद रेल सेवाएं बहाल
विरोध प्रदर्शन के चलते दिल्ली में रेल और मेट्रो सेवाएं भी प्रभावित हुई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को 245 रेल सेवाएं रद्द की गई थीं। हालांकि, रविवार से रेलवे ने सामान्य परिचालन बहाल करने की जानकारी दी है।
इससे पहले दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास संबंधी प्रतिबंध लगाए गए थे। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
CJP के प्रदर्शन को देखते हुए रविवार को लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।
प्रदर्शनकारियों के संभावित मार्च को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग भी की गई।
CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है।
ध्रुव राठी को भी किया गया रिहा
रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी रविवार तड़के करीब तीन बजे रिहा कर दिया गया। उन्हें शनिवार को प्रदर्शन से पहले गुरुग्राम स्थित आवास से हिरासत में लिया गया था।
वहीं, CJP की मुंबई इकाई ने भी रविवार शाम शिवाजी पार्क के पास विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया है।
विपक्षी नेताओं की हिरासत का मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
दिल्ली में विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिए जाने के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार को प्रतिबंधित करने के लिए एहतियाती हिरासत का इस्तेमाल किया गया।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संबंधित अधिकारियों से मांगे गए जवाब के बाद दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शन तथा पुलिस कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।





