रायपुर। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। राज्य सरकार की सतत निगरानी, पारदर्शी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पित प्रयासों के चलते लाखों गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तक समय पर आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है।


महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने योजना की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में अब तक 14 लाख 49 हजार 309 पात्र हितग्राहियों का सफल पंजीयन किया जा चुका है। इन सभी महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 558 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि सीधे हस्तांतरित की गई है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भुगतान प्रणाली के कारण लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिये के समय पर आर्थिक सहायता मिल रही है।


मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना विश्व की सबसे बड़ी डीबीटी आधारित मातृत्व सहायता योजनाओं में से एक है। एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की केस स्टडी के अनुसार इस योजना ने गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य एवं पोषण में उल्लेखनीय सुधार किया है। इसके सकारात्मक प्रभाव से मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में कमी लाने में भी मदद मिली है।


हर पात्र महिला तक योजना का लाभ पहुंचाने पर सरकार का फोकस

लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व, बेहतर पोषण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा योजना की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है और पात्र महिलाओं का समयबद्ध पंजीयन सुनिश्चित किया जा रहा है।


योजना के नाम पर साइबर ठगी से रहें सावधान

योजना की सफलता के साथ-साथ मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने साइबर ठगी को लेकर भी प्रदेशवासियों को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने बताया कि कुछ जिलों से शिकायतें मिली हैं कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के नाम पर फर्जी फोन कॉल कर महिलाओं से ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी या पैसे की मांग की जा रही है।


उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा योजना के नाम पर फोन कर ओटीपी, बैंक विवरण या किसी प्रकार की राशि मांगी जाती है, तो उसकी बातों में बिल्कुल न आएं। ऐसे कॉल साइबर अपराधियों के हो सकते हैं। किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल अपनी निकटतम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा संबंधित विभाग से संपर्क करें।


महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति किया जाएगा जागरूक

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों को निर्देश जारी किए हैं कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से हितग्राही महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही योजना से जुड़ी सही और प्रमाणिक जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए, ताकि कोई भी महिला साइबर ठगी का शिकार न बने।


उन्होंने कहा कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है, इसलिए प्रत्येक हितग्राही को योजना की सही जानकारी देना और उन्हें डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना विभाग की प्राथमिकता है।