छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा को बड़ा झटका, पांच नए मेडिकल कॉलेजों के प्रस्ताव पर एनएमसी की रोक

छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के विस्तार की योजना को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने राज्य के पांच नए मेडिकल कॉलेजों के प्रस्तावों पर फिलहाल रोक लगा दी है। इनमें दंतेवाड़ा, कवर्धा, कुनकुरी, जांजगीर और मनेंद्रगढ़ में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। इस फैसले के बाद राज्य में मेडिकल सीटें बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री बोले— “अभी मैच खत्म नहीं हुआ”

एनएमसी के इस निर्णय पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “अभी मैच खत्म नहीं हुआ है।” उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ 15 दिनों के भीतर अपील करेगी और प्रयास रहेगा कि इसी शैक्षणिक सत्र से इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू हो सके।

एनएमसी के फैसले के पीछे तकनीकी कारणों की आशंका

हालांकि एनएमसी की ओर से रोक के विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि यह निर्णय आधारभूत ढांचे, फैकल्टी की कमी या नियामकीय मानकों की पूर्ति न होने के कारण लिया गया हो सकता है। मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए आयोग द्वारा निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य होता है।

कांग्रेस पर मंत्री का हमला, कमीशनखोरी का आरोप

इसी बीच स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में “30–40 प्रतिशत कमीशनखोरी” जैसी प्रवृत्तियां हावी थीं। उन्होंने करीब 700 करोड़ के रीजेंट घोटाले का उल्लेख करते हुए जांच की बात दोहराई। मंत्री ने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने 400 करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान को रोका है और पिछली सरकार की तुलना में कई गुना अधिक मामलों की जांच कराई जा रही है।

अमानक दवाओं पर कार्रवाई तेज

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में अमानक दवाओं के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।