जांजगीर-चांपा। सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले एक आदतन शराबी चालक के खिलाफ जांजगीर-चांपा की अदालत ने अनोखा फैसला सुनाया है। तीसरी बार शराब के नशे में वाहन चलाते पकड़े गए आरोपी को केवल जुर्माना लगाने के बजाय 30 दिनों तक सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया गया है। अदालत का मानना है कि ऐसी सजा से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।


जानकारी के अनुसार, स्वदेश कुमार यादव को यातायात पुलिस ने तीसरी बार शराब के नशे में वाहन चलाते हुए पकड़ा। इससे पहले भी उसके खिलाफ मोटर यान अधिनियम की धारा 185 के तहत दो बार कार्रवाई हो चुकी थी। दोनों मामलों में अदालत ने उस पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था, लेकिन इसके बावजूद उसके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया।


एक बार फिर नशे की हालत में वाहन चलाते पकड़े जाने के बाद यातायात पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने इस बार केवल आर्थिक दंड देने के बजाय सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी सजा सुनाई।


अदालत के आदेश के अनुसार, आरोपी को लगातार 30 दिनों तक प्रतिदिन कोतवाली थाना परिसर की साफ-सफाई करनी होगी। इसके साथ ही उसे शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर लोगों को शराब पीकर वाहन न चलाने के लिए जागरूक करना होगा और सड़क सुरक्षा का संदेश देना होगा।


न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल जुर्माना पर्याप्त नहीं है। समाज में जिम्मेदारी की भावना विकसित करने और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इस प्रकार की सामुदायिक सेवा अधिक प्रभावी साबित हो सकती है।


इस फैसले को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि इस तरह की सजा से न केवल आरोपी को अपनी गलती का एहसास होगा, बल्कि अन्य वाहन चालकों को भी शराब पीकर वाहन चलाने से बचने की सीख मिलेगी।