रायपुर, 17 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने करीब 30 वर्ष पुराने गृह निर्माण ऋण गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में 15,000 पन्नों का चालान प्रस्तुत किया है। मामला सरकारी आवासीय योजना के तहत 1 करोड़ 86 लाख रुपये के कथित गबन से जुड़ा है, जो ब्याज सहित अब 104 करोड़ रुपये से अधिक का डूबत ऋण (NPA) बन चुका है।


सरकारी आवास योजना में कथित गड़बड़ी

जांच के अनुसार, यह मामला वर्ष 1995 से 1998 के बीच का है। आरोप है कि आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी ने मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्यादित, भोपाल के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के कुछ अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर सरकारी आवासीय योजना का लाभ उठाया।

जांच में सामने आया कि समिति के 186 सदस्यों के नाम पर प्रत्येक को 1-1 लाख रुपये के हिसाब से कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये का गृह निर्माण ऋण स्वीकृत कराया गया।


फर्जी दस्तावेजों के जरिए निकाली गई राशि

EOW की जांच में आरोप है कि ऋण स्वीकृत कराने के लिए फर्जी दस्तावेज, उपयोगिता प्रमाण-पत्र (Utilization Certificate) और पूर्णता प्रमाण-पत्र (Completion Certificate) प्रस्तुत किए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर ऋण की राशि जारी कराई गई, जबकि वास्तविक निर्माण कार्य नहीं हुआ।

समय के साथ यह ऋण ब्याज जुड़ने के कारण बढ़कर 104 करोड़ रुपये से अधिक का डूबत ऋण बन गया।


भौतिक सत्यापन में नहीं मिला एक भी मकान

जांच के दौरान अधिकारियों ने रायपुरा और पंडरी कांपा सहित उन स्थानों का भौतिक सत्यापन किया, जहां ऋण दस्तावेजों के अनुसार मकान निर्मित होना दर्शाया गया था।

हालांकि, जांच में एक भी मकान निर्मित नहीं मिला। इसके अलावा जिन लोगों के नाम पर ऋण स्वीकृत हुआ था, उनमें लक्ष्मीचंद चिमनानी, दिलीप कुमार बालानी, अमित कुमार सहित कई सदस्य अपने दर्ज पते पर नहीं मिले।


विशेष न्यायालय में पेश हुआ 15 हजार पन्नों का चालान

मामले की विस्तृत जांच पूरी करने के बाद EOW रायपुर ने तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायाधीश की अदालत में 15,000 पन्नों का चालान पेश किया है।

जांच एजेंसी का कहना है कि चालान में दस्तावेजी साक्ष्य, वित्तीय रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और जांच के दौरान जुटाए गए अन्य प्रमाण शामिल किए गए हैं।

अब इस बहुचर्चित मामले में आगे की सुनवाई विशेष न्यायालय में होगी, जहां प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।