बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के महावीरगंज क्षेत्र में संचालित ग्रेफाइट केमिकल प्लांट को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने प्लांट से निकलने वाला कथित रसायनयुक्त अपशिष्ट पानी नदी में छोड़े जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का दावा है कि कथित प्रदूषण का असर नदी के पानी के साथ आसपास के खेतों, फसलों और पशुओं पर भी पड़ रहा है। कुछ ग्रामीणों ने पशुओं की मौत और लोगों में त्वचा संबंधी समस्याएं होने की शिकायत भी की है। हालांकि इन दावों की वैज्ञानिक या प्रशासनिक जांच से पुष्टि होना अभी बाकी है।
नदी का पानी प्रदूषित होने का आरोप
ग्रामीणों के मुताबिक, प्लांट के आसपास लंबे समय से प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। उनका आरोप है कि प्लांट से निकलने वाला संदिग्ध रसायनयुक्त पानी नदी तक पहुंच रहा है, जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के पानी का इस्तेमाल आसपास के क्षेत्रों में खेती और पशुओं के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि पानी में हानिकारक रसायन मौजूद हैं तो इसका सीधा असर खेती, पशुधन और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
फसल प्रभावित, पशुओं की मौत का दावा
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रदूषित पानी के कारण उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा कुछ पशुओं की मौत होने का दावा भी किया गया है।
कुछ लोगों ने त्वचा संबंधी परेशानी होने की शिकायत की है। ग्रामीणों ने इन समस्याओं का संबंध कथित प्रदूषण से होने की आशंका जताई है। हालांकि इसका कारण क्या है, यह मेडिकल और वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
शिकायत के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से पहले भी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
उनका आरोप है कि केवल सामान्य निरीक्षण के बजाय नदी के पानी, मिट्टी और प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट की वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए, ताकि प्रदूषण की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
पानी और मिट्टी के सैंपल की लैब जांच की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी के पानी, आसपास के खेतों की मिट्टी और प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि जांच में प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रदूषण को तत्काल रोकने के इंतजाम किए जाएं।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायत पर जल्द जांच और उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल पर्यावरण प्रदूषण का नहीं, बल्कि उनकी खेती, पशुधन और स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है।
तहसीलदार ने दिया जांच का आश्वासन
मामले में तहसीलदार ने शिकायत की जांच कराने की बात कही है। उनका कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब प्रशासनिक और वैज्ञानिक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नदी के पानी और आसपास के पर्यावरण में वास्तव में प्रदूषण है या नहीं और यदि है तो उसका स्रोत क्या है।
ग्रामीणों की ओर से लगाए गए प्रदूषण, फसल नुकसान, पशुओं की मौत और स्वास्थ्य संबंधी आरोपों की अभी आधिकारिक या वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। प्लांट प्रबंधन का पक्ष भी उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।





